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अनियंत्रित विकास से गोवा की पहचान पर संकट

गोवा में तेजी से हो रहे अनियंत्रित विकास और पर्यावरणीय क्षरण के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश फर्डिनो रेबेलो ने एक संगठित जन आंदोलन की अपील की है। इसी क्रम मेेंं उन्होंने 6 जनवरी को पणजी स्थित इंस्टीट्यूट मेनेजेस ब्रागांजा में एक अहम बैठक बुलाई है, जहां प्रस्तावित पीपुल्स चार्टर के मसौदे पर चर्चा की जाएगी।

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कर्नाटक से गोवा जाने वाली एक क्षतिग्रस्त सड़क।

कर्नाटक से गोवा जाने वाली एक क्षतिग्रस्त सड़क।

रेबेलो ने कहा कि इस चार्टर का उद्देश्य आने वाली पीढिय़ों के लिए गोवा के पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा करना है। उन्होंने चेताया कि मौजूदा विकास मॉडल राज्य को धीरे-धीरे उसकी मूल पहचान से दूर ले जा रहा है।

नियोजन की अनदेखी से बढ़ती चिंता
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय योजना और आउटलाइन डेवलपमेंट प्लान जैसे स्थापित प्लानिंग फ्रेमवर्क को दरकिनार कर भूमि उपयोग में बड़े और स्थायी बदलाव किए जा रहे हैं। ये परिवर्तन गांवों की वहन क्षमता (कैरींग कैपेसिटी) का अध्ययन किए बिना मंज़ूर किए जा रहे हैं, जिससे जल संकट, यातायात समस्या और पर्यावरणीय असंतुलन गहराता जा रहा है। रेबेलो विशेष रूप से हमारे भंगारचेम गोएम की तबाही को लेकर मुखर दिखे। उन्होंने डेवलपर्स पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां लोगों को रोजाना मुश्किल से एक घंटे पानी मिल रहा है, वहीं स्विमिंग पूल वाले सैकड़ों प्लॉट तैयार किए जा रहे हैं। यह विकास नहीं, बल्कि संसाधनों का दुरुपयोग है।

एकजुट आंदोलन की तैयारी
रेबेलो ने बताया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बड़ी संख्या में गोवावासियों ने समर्थन जताया है। नागरिकों ने राज्य की पहाडिय़ों, झीलों, नदियों, समुद्र तटों और गांवों को बचाने के लिए एकजुट आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने सभी पर्यावरण-सचेत नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से अपील की कि वे 6 जनवरी की बैठक में शामिल होकर पीपुल्स चार्टर को अंतिम रूप देने और आंदोलन की भविष्य की रणनीति तय करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।