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श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ होलिका दहन, विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना, सुख-समृद्धि की कामना

शुभ मुहूर्त में होलिका दहनहुब्बल्ली शहर में होलिका दहन का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। कोटिलिंग नगर और केशवापुर में दो प्रमुख आयोजन संपन्न हुए, जहां स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार भी शामिल हुए। होलिका दहन से पूर्व पंडितों के मार्गदर्शन में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं […]

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हुब्बल्ली के कोटिलिंग नगर में होलिका दहन करते हुए।

हुब्बल्ली के कोटिलिंग नगर में होलिका दहन करते हुए।

शुभ मुहूर्त में होलिका दहन
हुब्बल्ली शहर में होलिका दहन का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। कोटिलिंग नगर और केशवापुर में दो प्रमुख आयोजन संपन्न हुए, जहां स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार भी शामिल हुए। होलिका दहन से पूर्व पंडितों के मार्गदर्शन में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर अग्नि प्रज्वलित की। इसके बाद शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। श्रद्धालुओं ने अग्नि में नारियल, गेहूं की बालियां, चने और नया अनाज अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और उन्नति की कामना की। हुब्बल्ली में आयोजित दोनों प्रमुख कार्यक्रमों में देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। प्रवासी परिवारों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया। महिलाओं और पुरुषों ने होलिका की तीन या सात परिक्रमा की और घर-परिवार की मंगलकामना की। परंपरा के अनुसार, नई फसल की बालियों को भूनकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया गया, जो समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक
सामाजिक कार्यकर्ता किशोर पटेल गोलिया चौधरियान ने बताया कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता ने उसे ईश्वर भक्ति से रोकने के लिए कई प्रयास किए, परंतु वह सफल नहीं हुआ। अंतत: हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। यह घटना सत्य, भक्ति और धर्म की विजय का संदेश देती है। इसी स्मृति में होलिका दहन किया जाता है।

परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना
मान्यता है कि होलिका दहन से पहले स्थान को शुद्ध कर लकडिय़ों और उपलों से चिता सजाई जाती है। पूजा के बाद अग्नि प्रज्वलित की जाती है। परिक्रमा करते समय परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। प्रवासी समाज के तेजाराम सीरवी ने बताया कि नारियल, गेहूं की बालियां, चना, गुड़ और नए अन्न को अग्नि में अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह नई फसल के आगमन और समृद्धि का प्रतीक है। होलिका दहन सामाजिक एकता, आपसी मेलजोल और बुराइयों को त्यागने का संदेश भी देता है।