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13 साल बाद नारकोटिक्स मामले में फैसला, चरस तस्करी के आरोपी को सात दिन की जेल और 10 हजार जुर्माना

नारकोटिक पदार्थ के साथ पकड़े जाने के तेरह साल बाद नॉर्थ गोवा की एक अदालत ने डोडामार्ग निवासी अनीश दरवाजकर को दोषी ठहराते हुए सात दिन की साधारण कैद और 10,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

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13 साल बाद नारकोटिक्स मामले में फैसला

13 साल बाद नारकोटिक्स मामले में फैसला

लंबे समय से लंबित इस मामले में फैसला आने के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में देरी का मुद्दा चर्चा में आ गया है। मामला अक्टूबर 2012 का है, जब गोवा पुलिस की एंटी-नारकोटिक सेल ने आरोपी को असगाओ बस स्टॉप से रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, दरवाजकर उस समय एक संभावित ग्राहक को ड्रग्स की डिलीवरी देने का इंतजार कर रहा था। उसके पास से करीब 75,000 रुपए मूल्य की 500 ग्राम चरस बरामद की गई थी। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोपी ने नरमी की मांग की, अदालत ने तथ्यों पर दिया फैसला
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी पहली बार अपराध में शामिल पाया गया था और घटना के समय उसकी उम्र भी कम थी। इसके साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि मामले के निपटारे में अत्यधिक समय लग चुका है, जिसे सजा में रियायत के तौर पर देखा जाना चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि नारकोटिक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में नरमी गलत संदेश दे सकती है। अभियोजन पक्ष ने अदालत से सख्त सजा देने की मांग की।

नशे के बढ़ते खतरे पर लगाम
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अपराध की प्रकृति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, हालांकि आरोपी की उम्र और पहली बार अपराध में लिप्त होने जैसे तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सजा की अवधि सीमित रखी गई है। अदालत ने आरोपी को सात दिन की साधारण कैद के साथ 10,000 रुपए जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि नारकोटिक मामलों में समय पर सुनवाई और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। पुलिस और अभियोजन एजेंसियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्ती और त्वरित कार्रवाई ही नशे के बढ़ते खतरे पर लगाम लगा सकती है।