
आत्मा और अंतर्मन का श्रृंगार है पर्युषण पर्व
सिंधनूर (रायचूरु).
उप प्रवर्तक नरेश मुनि ने पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह अवसर आत्मशुद्धि और आत्म सिद्धि आध्यात्मिक शिविर हैं। इस पर्व के माध्यम से व्यक्ति मन शुद्धि, कर्म शुद्धि और जीवन शुद्धि कर सकता है। शुभ संकल्प और शुद्ध आचरण के साथ तमोगुण का नाश और सद्गुणों को आह्वान करके जीवन को प्रकाशमय बनाने का सुअवसर है। अपनी गलतियों पर सोचने और उन्हें सुधारने का प्रयास करके गरिमामय जीवन जीने का अवसर है। संयम, त्याग, तप, चिंतन, प्रायश्चित के माध्यम से अहिंसा, प्रेम, दया और करुणा के आचरण से अपने जीवन को रूपांतरित करने का सुयोग है।
संतों के सान्निध्य में साधक को प्रज्ञा की आंख, विवेक का चक्षु और आत्मबोध की प्राप्ति करके मुक्ति की दिशा में जीवन बिताने के लिए अग्रसर होना है। पर्युषण पर्व आत्मा और अंतर्मन का श्रृंगार है। पर्युषनण पर्व की प्रयोगशाला में आत्म तत्व के परीक्षण का सुअवसर आया है। आओ हम मन में विवेक का दीपक जलाकर अंतर्मन को रोशन करें।
गुरुदेव ने कहा कि अब तक हमने ना जाने अज्ञानतावश और जानबुझ कर कितनी ही गांठे अपने जीवन में बांध ली है। गांठे बांधना आसान है, मगर खोलना बहुत मुश्किल। भीतर में पल रहे वैर भाव और मलीनता को दूर करने के लिए जीवन की क्षण भंगुरता को समझें, ना जाने किसका ये अंतिम पर्व पर्युषण हो। हमारे सिर पर को कर्मो का जो बोझ है उसे अगर हटाना है तो अपने आपको इस मोह माया रुपी दलदल से बाहर निकालना है। चार गति और आठ कर्मों से मुक्त होना है तो हमें प्रायश्चित रूपी पानी से अपने आपको पवित्र करना पड़ेगा। शरीर का मेकअप बहुत हो गया, अब हमें आत्मा का चेकअप करना पड़ेगा।
शालीभद्र मुनि ने युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि अपनी युवा शक्ति का सदुपयोग सही दिशा के निर्धारण में करें। अपनी सुप्त शक्ति को जगाकर आत्मिक शक्ति में रूपांतरित करें। अपने जीवन को सफल, सुंदर और अर्थमय बनाने का जो अवसर मिला है उसका लाभ लेकर व्यसन मुक्त और धर्म युक्त जीवन का निर्माण करें। साध्वी दर्शन प्रभा और साध्वी समृद्धि श्री ने तप, त्याग, साधना का महत्व बताते हुए पर्युषण पर्व के महत्ता को समझाया।
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Published on:
12 Sept 2023 07:00 pm

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