
श्रीयादेवी माताजी जन्मोत्सव के अवसर पर मंगलवार को हुब्बल्ली में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में विचार रखते प्रजापत समाज के लोग।
परिचर्चा में यह भाव उभरकर आया कि परंपरा, आस्था और आधुनिक शिक्षा के संतुलन से प्रजापत समाज नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हो सकता है। समाज की एकजुटता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। मान्यता के अनुसार श्रीयादेवी माताजी का जन्म गुजरात के पाटन क्षेत्र में हुआ। उन्हें विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है। श्रीयादेवी माताजी प्रजापत समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। समाज में यह विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में उन्नति, स्थिरता और सद्बुद्धि प्राप्त होती है।
समाज की मेहनत और दक्षिण भारत में प्रगति
जालोर जिले के थलवाड़ निवासी उदाराम प्रजापत ने कहा, आज प्रजापत समाज मेहनत और परिश्रम से आगे बढ़ रहा है। समूचे दक्षिण भारत में समाज के लोग व्यवसाय से जुड़े हैं। हालांकि राजस्थान से पलायन की गति पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन समाज आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है।
श्रीयादेवी की भक्ति से उन्नति का मार्ग
पाली जिले के गुड़ा पदमसिंह निवासी बाबूलाल प्रजापत ने कहा, यदि श्रीयादेवी माताजी की सच्चे मन से आराधना की जाए तो समाज और व्यक्ति दोनों स्तर पर प्रगति संभव है। आस्था समाज को एक सूत्र में बांधती है। मिट्टी के बर्तन प्रजापत समाज की पहचान, आजीविका और संस्कृति का आधार रहे हैं।
जगन्नाथ मंदिर और मिट्टी के बर्तन
पाली जिले के सिरियारी निवासी मनोहर प्रजापत ने कहा, आज भी जगन्नाथ मंदिर में भोजन मिट्टी के बर्तनों में ही तैयार किया जाता है। यह मिट्टी की पवित्रता और प्रजापत समाज की परंपरा का जीवंत प्रमाण है।
शिक्षा में जागरूकता और युवाओं की भागीदारी
पाली जिले के गुड़ा पदमसिंह निवासी विक्रम प्रजापत ने कहा, प्रजापत समाज अब शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। युवा वर्ग विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहा है, जिससे समाज में नई चेतना आई है। काशी सहित देश के कई हिस्सों में चाय कुल्हड़ में और चाट मिट्टी के बर्तनों में परोसने की परंपरा फिर से लौट रही है। यह पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए शुभ संकेत है।
देशभर में फैला प्रजापत समाज
जालोर जिले के थलवाड़ निवासी छगनलाल प्रजापत ने कहा, आज प्रजापत समाज पूरे देश में फैला हुआ है। हालांकि परंपरागत पेशे से जुड़े लोगों की संख्या कम हुई है, फिर भी मिट्टी से समाज का रिश्ता आज भी जीवित है।
मिट्टी के बर्तन: पवित्रता और जागरूकता
जालोर जिले के निवासी जबराराम प्रजापत ने कहा, मिट्टी के बर्तन पवित्र माने जाते हैं। अब लोग प्लास्टिक के नुकसान को समझ रहे हैं और प्राकृतिक विकल्पों की ओर लौट रहे हैं।
प्रजापत समाज का इतिहास प्राचीन
जालोर जिले के थलवाड़ निवासी केसाराम प्रजापत ने कहा, राजस्थान में प्रजापत समाज का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना के समय प्रजापत समाज को पृथ्वी पर भोजन व जल की व्यवस्था के लिए मिट्टी के बर्तनों का दायित्व दिए जाने की मान्यता है।
Published on:
20 Jan 2026 08:03 pm
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