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पौने दो सौ साल पहले कोप्पल आए राजस्थान मूल के लोग, आठवीं पीढ़ी निवास कर रही

जैन तीर्थंकरों के सैकड़ों मंदिर, दक्षिण की काशी के नाम से मशहूर हैं कोप्पल

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श्री जैन स्थानक भवन कोप्पल

श्री जैन स्थानक भवन कोप्पल

राजस्थान के लोगों का कर्नाटक से नाता बहुत पुराना है। आजादी से बहुत पहले ही राजस्थानियों का कर्नाटक आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है। करीब पौने दो सौ साल पहले राजस्थान के लोग कोप्पल (कर्नाटक) आ गए थे। तब से लगातार कर्नाटक राजस्थान के लोगों की पसंद बनी हई है। उस दौरान आवागमन के साधनों का अभाव हुआ करता था। ऐसे में बैलगाड़ी या फिर पैदल चलकर आना पड़ता था। ऐसा बताते हैं कि राजस्थान के जैतारण मूल के कालूराम केसरीमल चौपड़ा परिवार वर्ष1850 के आसपास राजस्थान से कर्नाटक आए। अब उनकी आठवीं पीढ़ी कोप्पल में निवास कर रही है। बताते हैं उस दौरान वे किसी बैलगाड़ी के जरिए यहां तक पहुंचे। इसी तरह मोहनलाल जांगड़ा 1908 में कुकनूर आए और फिर यहां से कुछ समय बाद कोप्पल आ गए। हालांकि मौजूदा समय में राजस्थान से कर्नाटक आने का सिलसिला कम हुआ है।
कोप्पल में राजस्थान मूल के जैन समाज के स्थानकवासी, तेरापंथी एवं मंदिरमार्गी परिवार निवास कर रहे हैं। जैन परिवार में अधिकांश परिवार जैतारण पट्टी एवं सिंवाची पट्टी से है। माहेश्वरी, राजपुरोहित, चौधरी, राजपूत, माली, प्रजापत समेत अन्य जातियों के लोग भी है। यहां राजस्थान मूल के लोग अधिकांशतया अनाज, किराणा, कपड़ा, खाद, ज्वैलरी के बिजनेस में अधिक है। राजस्थान मूल के लोग चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट, अधिवक्ता एवं अन्य पेशे में भी है। समाज के लोग राजनीति में भी है। स्थानकवासी समाज के महेन्द्र चौपड़ा नगरपालिका के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं। गणेशलाल तालेड़ा भी नगरपालिकाध्यक्ष रहे हैं।

कर्नाटक केसरी गणेशलालमहाराज का चातुर्मास हो चुका
मुनि सुव्रतस्वामी जैन श्वेताम्बर सकल संघ कोप्पल बना हुआ है। एस.एस. जैन संघ कोप्पल के वर्तमान में अध्यक्ष अभयकुमार मेहता जैतारण एवं सचिव गौतमचन्द पी. मेहता जैतारण है। तेरापंथ भवन यहां 1976 में बना। तेरापंथ समाज के अधिकांश लोग सिंवाची पट्टी से हैं। यहां 1940 एवं 1943 में कर्नाटक केसरी गणेशलाल महाराज का चातुर्मास भी हो चुका है। मौजूदा समय में कोप्पल में कनक मुनि आदि ढाणा-3 का चातुर्मास चल रहा है। महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव यहां धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य बाजार से होते हुए शोभायात्रा निकाली जाती है।

महावीर जैन गौशाला
कोप्पल के गौशाला रोड पर श्री महावीर जैन गौशाला की स्थापना 1944 में की गई जो निरन्तर चल रही है। गणेशलाल महाराज की प्रेरणा से गौशाला स्थापित की गई। यहां करीब 1100 से अधिक गायें हैं जिनकी देखभाल की जा रही है। यहां लायंस क्लब की ओर से नेत्र चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा है जहां नि:शुल्क इलाज की सुविधा है। राजस्थानी समुदाय के कई लोग क्लब से सक्रिय रूप से जुड़े रहकर सेवाएं दे रहे हैं।

साधु-संत वर्षों से आ रहे
कालूराम केसरीमल चौपड़ा परिवार के आठवीं पीढ़ी के सदस्य प्रकाश चौपड़ा जैतारण कहते हैं, कोप्पल पहाड़ों से धिरा इलाका है। ऐसे में यह जगह संथारा के लिए उपर्युक्त लगी। कई साधु-संत वर्षों से इस इलाके में आते रहे। यह उनकी पसंदीदा जगह बन गई।

परम्पराओं का निर्वहन
राजस्थान के जैतारण मूल के अश्विन जांगड़ा कहते हैं, आज भी वे संयुक्त परिवार में रह रहे हैं। यह सीख उन्हें परिवारिक गुणों के चलते मिली। राजस्थान के संस्कार एवं परम्पराओं का आज भी निर्वहन कर रहे हैं। कोप्पल को दक्षिण की काशी के नाम से भी जानते हैं। यहां सैकड़ों जैन मंदिर बनेे हैं।

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