राजस्थान सूं अपणायत मायड़ भूमि से लगाव आज भी, राजस्थान में बिजनस स्थापित करने से बढ़ेगा जुड़ाव बालोतरा जिला बनने से इलाके का विकास होगा अधिक रिफाइनरी से बढ़े रोजगार के अवसर, अनार ने खोले समृद्धि के द्वार हुब्बल्ली में निवास कर रहे बालोतरा एवं आसपास के प्रवासियों से राजस्थान पत्रिका की परिचर्चा रीडर्स फेस्ट
हुब्बल्ली.
सूरज कण कण नै चमकावै,
चन्दो इमरत रस बरसावै,
तारा निछरावळ कर ज्यावै,
धरती धोरां री!
कला-संस्कृति एवं इतिहास को समेटे त्याग और बलिदान की भूमि राजस्थान से प्रवासियों का लगाव निरंतर बना हुआ है लेकिन युवा पीढ़ी को जोड़े रखने लिए अब गांवों में सम्मेलन आयोजित किए जाने लगे हैं। राजस्थान में बालोतरा के जिला बनने की लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अब गजट नोटिफिकेशन के बाद बालोतरा नया जिला बन जाएगा। बालोतरा एवं आसपास के क्षेत्र से आकर हुब्बल्ली में रच-बस चुके प्रवासियों का कहना है कि बालोतरा के नया जिला बनने पर विकास को पंख लगेंगे। इलाके में रिफाइनरी आने से भी रोजगार के द्वार खुले हैं। बालोतरा व नगरी के नाम से जानी जाती रही है और इस क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। यहां की कला-संस्कृति एवं जीवन शैली का कोई सानी नहीं है। अपने ऐतिहासिक स्मारकों एवं मंदिरों के लिए यह इलाका खासा प्रसिद्ध है। भले ही इन इलाकों से हजारों किमी दूर आकर कर्नाटक में आकर रच-बस गए हैं लेकिन प्रवासियों का जन्मभूमि से अपनापन आज भी बना हुआ है। राजस्थान पत्रिका के साथ परिचर्चा में प्रवासियों ने अपनी बात रखी। राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने परिचर्चा का संयोजन किया। प्रस्तुत हैं प्रवासियों के साथ हुई बातचीत:
बिजनस स्थापित करने के लिए सरल नीति बने
कर्नाटक में बिजनस करने वाले प्रवासी यदि राजस्थान में बिजनस सेटअप करें तो उनका जन्मभूमि के प्रति जुड़ाव और बढ़ सकता है। राजस्थान में पिछले एक दशक से अच्छा विकास हो रहा है। ऐसे में राजस्थान सरकार यदि प्रवासियो को लेकर बिजनस स्थापित करने में सरल नीति अपनाती हैं तो कई प्रवासी वहां उद्योग स्थापित करने में जरूर रुचि दिखा सकते हैं। राजस्थान में ऐसी एकल खिड़की की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि उद्योग लगाने की सारी प्रक्रियाएं एक ही छत के नीचे पूरी की जा सकें। आसान प्रक्रिया होने पर प्रवासी उद्योग लगाने के लिए आगे आ सकेंगे।
- रमेश बाफना, मोकलसर निवासी।
बालोतरा एवं आसपास स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
राजस्थान के बालोतरा एवं आसपास के क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। डायलिसिस एवं बड़े इलाज के लिए लोगों को जोधपुर या अहमदाबाद जाना पड़ता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत अधिक विकास नहीं हुआ है। कई भामाशाहों ने भवन जरूर बनाकर सरकार को सुुपुर्द किए हैं लेकिन पर्याप्त रखरखाव नहीं हो रहा है। सुविधाओं का अभाव नजर आता है। कई गावों तक आज भी रोडवेज की बसें नहीं पहुंच पाई हैं। बालोतरा के जिला बनने से निश्चित ही सभी क्षेत्रों में विकास तेज गति से हो सकेगा।
- हीराचन्द तातेड़, कोटड़ी मूल के।
जुड़ाव के लिए गांवों में रख रहे परिचय सम्मेलन
नई पीढ़ी का राजस्थान आना-जाना कम हुआ है। ऐसे में जन्म भूमि से जुड़ाव के लिए पिछले दो साल से गांवों में सम्मेलन करना शुरू किया है। रमणिया, सिवाना, मोकलसर समेत अन्य कई गांवों में तीन दिन के सम्मेलन रखे जाते हैं जिसमें सभी प्रवासी शामिल होते हैं। यह सम्मेलन साल के आखिर में रखे जाते हैं। इससे नई पीढ़ी का जुड़ाव हो रहा है। रमणिया में पहले जैन समाज के करीब 80 परिवार थे लेकिन अब दस फीसदी परिवार भी गांव में निवास नहीं रह रहे हैं। अधिकांश परिवारों ने विभिन्न प्रदेशों में बिजनस स्थापित कर लिया है।
- महावीर कुमार पारलेचा, रमणिया मूल के।
विकास को लगेेंगे पंख
बालोतरा नया जिला बनने से जरूर आसपास के लोगों को अधिक फायदा मिलेगा। अभी कई गांवों से बाड़मेर की दूरी अधिक होने से जिला मुख्यालय पर जाने में समय एवं श्रम अधिक लगता है। ऐसे में बालोतरा के नया जिला बनने से लोगों का काम आसान हो जाएगा। इससे क्षेत्र का विकास भी अधिक तेज गति से हो सकेगा।
- पर्बतसिंह खींची, वरिया गांव के रहने वाले।
रिफाइनरी से इलाके में चमन
क्षेत्र में रिफाइनरी आने से बालोतरा-पदपदरा इलाके में होटल व्यवसाय तेजी से विकसित हुआ है। इससे स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिला है। बिजनस को पंख लगे हैं। पचपदरा से जोधपुर के लिए फोरलाइन बनाने की योजना बनाई गई है। ऐसे में इलाका चमन हो रहा है।
बाबूसिंह राजपुरोहित, पटाऊ खुर्द मूल के।
अनार की फसल से लौटी खुशहाली
इलाके में अनार के बगीचे से किसानों में खुशहाली लौटी है। एक साल में एक पौधा एक से दो हजार रुपए की आमदनी दे रहा है। कभी किसान कौम रही पटेल समाज अब शिक्षा, बिजनस एवं राजनीति में आगे बढ़ रही है। करीब दो दशक पहले तक इलाके में जीरे की फसल खूब होती थी। पानी की कमी के चलते यह फसल कम हो गई। एक दशक से अब अनार चमक रहा है। अनार की फसल मीठे-खारे दोनों पानी में हो जाती है। बालोतरा के पोपलीन की डिमांड अब भी बनी हुई है।
- सांवलाराम पटेल, दाखा मूल के।