
प्रवर्तन निदेशालय
सरकारी रिकॉर्ड में कॉपर, असल में सोना
ईडी की जांच में सामने आया है कि सबरीमाला मंदिर की कुछ पवित्र वस्तुएं, जिन पर सोने की परत चढ़ी थी, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में कॉपर प्लेट दर्शाया गया। आरोप है कि 2019 से 2025 के बीच इन वस्तुओं को योजनाबद्ध तरीके से मंदिर परिसर से बाहर निकाला गया। इसके बाद इन्हें कर्नाटक एवं चेन्नई की कुछ निजी जगहों पर ले जाकर केमिकल प्रक्रिया से सोना अलग किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, निकाले गए सोने को बाजार में बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि को अलग-अलग लोगों के बीच बांटकर छुपाया गया। इस पूरे मामले में मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारी, निजी व्यक्ति, बिचौलिए और ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। ईडी को यह केस केरल क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई कई एफआइआर के बाद सौंपा गया था। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ईडी ने 9 जनवरी 2026 को मामला दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की।
डिजिटल डेटा और दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान ईडी ने डिजिटल डेटा, महत्वपूर्ण दस्तावेज, अकाउंट बुक्स और ज्वेलरी से जुड़े कागजात जब्त किए हैं। एजेंसी इस रकम को अपराध से अर्जित आय मानते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किसके पास गया, कहां छुपाया गया और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके साथ ही जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि मंदिर में चढ़ावे, अनुष्ठानों से जुड़ी राशि और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। ईडी इन सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है, जिससे सबरीमाला मंदिर से जुड़े इस गंभीर मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
Updated on:
20 Jan 2026 12:52 pm
Published on:
20 Jan 2026 12:52 pm
