
हुब्बल्ली में आयोजित संगोष्ठी में महाराणा प्रताप की तस्वीर के समक्ष श्रद्धा सुमन अर्पित करते समाज के लोग।
कार्यक्रम में महाराणा प्रताप की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। संगोष्ठी के दौरान समाज के प्रबुद्धजनों ने महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग, संघर्ष और स्वाभिमान पर विचार व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजुपरोहित ने महाराणा प्रताप की जीवनी पर प्रकाश डाला।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी जीवन
राजस्थान राजपूत समाज संघ हुब्बल्ली के अध्यक्ष पर्बतसिंह खींची वरिया ने कहा, महाराणा प्रताप का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। उनका पुण्य दिवस हर वर्ष सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को उनके संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान का ज्ञान हो सके। ऐसे आयोजनों से इतिहास के सच्चे नायकों को समझने का अवसर मिलता है।
राष्ट्र की रक्षा के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित
राजस्थान राजपूत समाज संघ के पूर्व कोषाध्यक्ष खेतसिंह राठौड़ सांडन ने कहा, महाराणा प्रताप ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका प्रत्येक संघर्ष पुण्य कार्य के समान था। उन्होंने यह सिद्ध किया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए त्याग और बलिदान सबसे बड़ा धर्म होता है।
सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया
राजस्थान राजपूत समाज संघ के सह सचिव रिड़मलसिंह सोलंकी सिवाना ने कहा, इतिहास उन्हीं को याद रखता है जो सम्मान के साथ जीने का मार्ग चुनते हैं। महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर भी सिर झुकाना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने संघर्ष को कभी नहीं भुलाया, एकता बनाए रखी और अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया। महाराणा प्रताप की वीरता अद्वितीय है। उनका साहस और आत्मबल आज भी समाज को प्रेरित करता है। उन्होंने यह सिखाया कि सच्ची वीरता केवल युद्ध में नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर अडिग रहने में होती है।
साहस, पराक्रम और धैर्य के प्रतीक
जालमसिंह देवड़ा सवराटा (सिरोही) ने कहा, महाराणा प्रताप एक महान योद्धा थे। उनका जीवन साहस, पराक्रम और धैर्य का प्रतीक है। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे, जो आज भी प्रेरणा देता है।
36 कौमों को साथ लेकर चले
अरविन्दसिंह भायल देवान्दी (बालोतरा) ने कहा, महाराणा प्रताप स्वाभिमान के लिए लड़े और 36 कौमों को साथ लेकर एकता का परिचय दिया। उन्होंने यह संदेश दिया कि जब लक्ष्य राष्ट्रहित हो, तब समाज के सभी वर्ग मिलकर इतिहास रच सकते हैं।
द्वंद्व कहां तक पाला जाए…
खुमानसिंह भायल पादरड़ी कला (बालोतरा) ने कहा, द्वंद्व कहां तक पाला जाए और युद्ध कहां तक टाला जाए…महाराणा प्रताप का जीवन इस प्रश्न का सटीक उत्तर है। जब स्वाभिमान और स्वतंत्रता पर आंच आए, तब संघर्ष ही अंतिम विकल्प होता है।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर कालूसिंह चौहान निंबोल (ब्यावर), किशनसिंह भाटी झिनझिनयाली (जैसलमेर), हेमसिंह महेचा नोसर (बाड़मेर), आमसिंह राठौड़ उम्मेदाबाद (जालोर) एवं मनोजसिंह राठौड़ सांडन (जालोर) समेत समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने महाराणा प्रताप के जीवन, त्याग और संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी समाज और राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक हैं। विशेष रूप से युवाओं से महाराणा प्रताप के स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
Updated on:
19 Jan 2026 06:29 pm
Published on:
19 Jan 2026 05:55 pm
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