
एस.आर.एस. कर्नाटक पब्लिक स्कूल रायनाल (कर्नाटक) की उप प्राचार्य एवं हिंदी शिक्षिका डॉ. रेणुका ताई संतबा अपने विद्यालय में अहिंदी भाषी बच्चों को हिंदी सिखाने के सरल, रोचक और नवाचार तरीकों की जानकारी देते हुईं।
दक्षिण भारत के अहिंदी भाषी बच्चों के लिए हिंदी अक्सर एक चुनौती मानी जाती है। लेकिन कर्नाटक में हुब्बल्ली के पास रायनाल गांव में यह चुनौती अब एक प्रेरक प्रयोग में बदल चुकी है। एस.आर.एस. कर्नाटक पब्लिक स्कूल रायनाल की उप प्राचार्य एवं हिंदी शिक्षिका डॉ. रेणुका ताई संतबा ने स्कूल परिसर में एक अनोखी लैंग्वेज लैब की शुरुआत की है, जिसे नाम दिया गया है ताई भाषा प्रयोगशाला। यह प्रयोग सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं, यह देशभर के शिक्षकों के लिए एक संदेश है कि जब शिक्षक सपना देखे और उसे अपने समर्पण से गढ़े, तो भाषा भी दीवार नहीं सेतु बन जाती है।
पढऩा, समझना, बोलना, हिंदी के कई रंग
ताई भाषा प्रयोगशाला में हिंदी सीखना किताबों तक सीमित नहीं है। एक कोने में हिंदी की पुस्तकें, शब्दकोश और समाचार पत्र हैं, जहां बच्चे स्वाभाविक रूप से पढऩे की आदत विकसित करते हैं। पास ही बना ताई व्याकरण कक्ष वृक्षनुमा आकृति के माध्यम से भाषा के विविध रूपों को समझाता है। भाषा का परिचय, व्याकरण के प्रकार, वचन, क्रिया, लिंग जैसे विषय दृश्यात्मक तरीके से समझाए जाते हैं। इसके आगे है अभिव्यक्ति मंच जहां छात्र हिंदी में बोलना सीखते हैं, प्रस्तुति देते हैं, अभिनय करते हैं और नृत्य के माध्यम से भी अभिव्यक्ति करते हैं। यह मंच बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।
खेल-खेल में सीखना जहां गलतियां भी सिखाती हैं
टीचिंग लर्निंग मटेरियल का अलग कोना है, कहानियां, सहायक सामग्री, छोटे-छोटे खेल और दृश्य माध्यम। यहां बच्चे देखकर सीखते हैं, खेल-खेल में समझते हैं। तृतीय भाषा के रूप में हिंदी सीखने वाले विद्यार्थी भी यहीं बैठकर सहजता से भाषा से जुड़ते हैं।
सेल्फी कॉर्नर
भाषा संगम इस प्रयोग का दिल है, जहां हिंदी के साथ कन्नड़ से भी प्रेम सिखाया जाता है। यह संगम सभी भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना जगाता है। सेल्फी कॉर्नर बच्चों को भाषा के साथ जुडऩे का मजेदार अवसर देता है, हालांकि जोर हिंदी पर ही रहता है।
प्रोत्साहन की मुहर, सीखने का उत्सव
यहां मूल्यांकन भी अनोखा है। जैसे गजेटेड अधिकारी प्रमाण पत्र पर मुहर लगाते हैं, वैसे ही बच्चों की नोटबुक में रंगीन मुहरें लगती हैं, धन्यवाद, उत्कृष्ट, अत्युत्तम, सर्वश्रेष्ठ, शाबास। स्टार सिस्टम बच्चों को और उत्साहित करता है, कहीं तीन, कहीं चार, तो कहीं पांच सितारे। स्वर-व्यंजन सिखाने के लिए अनार, आम, इमली जैसी आकृतियां वाली मुहरें भी बनाई गई हैं जिससे अक्षर सीखना खेल बन जाता है।
कठपुतली, कस्तूरी और चक्र, सीखने के नए रास्ते
वे कहती हैं, राजस्थान के उदयपुर की एक कार्यशाला से लाई गई गुड़े-गुडिया (कठपुतलियां) बच्चों को संवाद सिखाने का माध्यम हैं। उत्तराखंड से लाई गई कस्तूरी कुंडली के जरिए कबीर दास के संदेश समझाए जाते हैं कि कस्तूरी मृग की खुशबू उसके भीतर ही होती है।
पत्र लेखन का रोचक माध्यम
पत्र लेखन को रोचक बनाने के लिए आठ रंगीन पर्चियां, प्रेषक, सेवा में, महोदय आदि खेल-खेल में सही प्रारूप सिखाती हैं। चक्र घुमाओ—लिंग पहचानो जैसी गतिविधियां बच्चों को अपने आप पढऩे और समझने की आदत डालती हैं।
निजी समर्पण से सार्वजनिक प्रेरणा
डॉ. रेणुका ताई संतबा बताती हैं कि भाषा प्रयोगशाला उनका पुराना सपना था। पहले जहां-जहां पोस्टिंग रही, वहां संसाधन सीमित थे। वे वर्ष 2017 से इस स्कूल में कार्यरत हैं और कुल 23 वर्षों की सरकारी सेवा का अनुभव रखती हैं। सबसे प्रेरक तथ्य यह है कि इस पूरी प्रयोगशाला के लिए उन्होंने किसी से कोई धनराशि नहीं ली अपने वेतन से ही सारा कार्य करवाया।
Published on:
27 Jan 2026 07:07 pm
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