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राधे कृष्ण मंदिर व राजेश्वर भगवान मंदिर में वैदिक विधि-विधान से ध्वजा अर्पण, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

पूजा-अर्चनाहुब्बल्ली के श्री राधे कृष्ण मंदिर एवं श्री राजेश्वर भगवान मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वार्षिक ध्वजा चढ़ाने का पावन आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के वातावरण में विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ। इस धार्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में समाज बंधुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर […]

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हुब्बल्ली के राधे कृष्ण मंदिर एवं राजेश्वर भगवान मंदिर में वार्षिक ध्वजा चढ़ाते के अवसर पर आयोजितक समारोह में उपस्थित समाज के लोग।

हुब्बल्ली के राधे कृष्ण मंदिर एवं राजेश्वर भगवान मंदिर में वार्षिक ध्वजा चढ़ाते के अवसर पर आयोजितक समारोह में उपस्थित समाज के लोग।

पूजा-अर्चना
हुब्बल्ली के श्री राधे कृष्ण मंदिर एवं श्री राजेश्वर भगवान मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वार्षिक ध्वजा चढ़ाने का पावन आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के वातावरण में विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ। इस धार्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में समाज बंधुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर हो गया। राधे कृष्ण मंदिर में ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य लाभार्थी चेनाराम काग जेठंतरी परिवार को प्राप्त हुआ, जिन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ ध्वजा अर्पित की। वहीं राजेश्वर भगवान मंदिर में ध्वजा चढ़ाने का पुण्य लाभ दुदाराम कोन्दली थोब परिवार को प्राप्त हुआ। दोनों ही स्थलों पर पुजारियों द्वारा शास्त्रोक्त पूजा-अर्चना कराई गई तथा भगवान से समाज, नगर एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

आध्यात्मिक वातावरण
ध्वजा चढ़ाने के पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण भजन-कीर्तन, जयकारों से गूंज उठा, जिससे आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया। कार्यक्रम में हुब्बल्ली-धारवाड़ क्षेत्र के समाज बंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और परस्पर शुभकामनाएं दीं। वरिष्ठजनों ने इस परंपरा को समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे का सशक्त प्रतीक बताया। आयोजन से जुड़े समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक कायक्रम न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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