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कडूर के नारियल की डिमांड, हर सप्ताह एक लाख से अधिक नारियल दूसरे राज्यों में भेजे जा रहे

कर्नाटक के चिकमगलूरु जिले के कडूर के नारियल की मांग अन्य प्रदेशों में बढ़ रही है। भारी मांग के चलते हर सप्ताह कडूर तालुक से एक लाख से ज्यादा नारियल दूसरे राज्यों में भेजे जा रहे हैं। कडूर में नारियल एक प्रमुख फसल है।

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नारियल की डिमांड

नारियल की डिमांड

किसानों से सीधे खरीद
थोक व्यापारी 1,000 नारियल खरीदने के लिए लगभग 17,000 से 19,000 रुपए का भुगतान करते हैं और उनके कर्मचारी खुद खेतों में जाकर नारियल तोड़ते हैं। किसान 100 नारियल की कटाई के बदले उन्हें 10 नारियल देते हैं। तालुक में कई विक्रेता हैं जो किसानों से नारियल खरीदते हैं। फिर इन्हें एपीएमसी में ले जाया जाता है और एजेंटों को बेचा जाता है जो प्रत्येक नारियल को 26 से 28 रुपए की लागत से खरीदते हैं।

लॉरी में लगभग 1,000 नारियल लोड
ये एजेंट फिर प्रत्येक लॉरी में लगभग 1,000 नारियल लोड करते हैं। हर सप्ताह एपीएमसी से लगभग दस ऐसे लोड मुंबई, पुणे, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और मनाली ले जाए जाते हैं। वहां नारियल 50 रुपए प्रति पीस पर बेचे जाते हैं। परिवहन लागत सहित प्रत्येक नारियल पर व्यापारी को 5 रुपए का लाभ होता है।

नारियल पर पांच रुपए का मुनाफा
विक्रेता कटाई करने वालों को 1,500 रुपए, सहायकों को 800 रुपए और दिहाड़ी मजदूरों को 750 रुपए का भुगतान करते हैं। श्रमिकों को भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी लागतों को घटाकर विक्रेताओं को प्रत्येक नारियल पर चार से पांच रुपए का लाभ होता है।

दिल्ली में अधिक लाभ
एक नारियल विक्रेता ने कहा कि अगर नारियल को दिल्ली और अन्य स्थानों पर ले जाया जाए तो अधिक लाभ होता है। वर्तमान में नारियल की उपलब्धता कम है। कडूर का नारियल न केवल अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहे राज्यों की मांग को पूरा कर रहा है, बल्कि घर पर उत्पादकों के लिए भी अच्छा लाभ कमा रहा है।

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