
Veer Durgadas Rathod jayanti celebrations
हुब्बल्ली. देश व धर्म के लिए सर्वस्व बलिदान करने वालों को ही समाज मान-सम्मान देते हुए श्रद्धा से याद करता है। ऐसे ही वीर दुर्गादास राठौड़ हुए हैं। जिन्होंने मारवाड़ राज्य की रक्षा के लिए संपूर्ण जीवन लगा दिया। उनके इसी त्याग व समर्पण के लिए उन्हें संपूर्ण भारत में राष्ट्र वीर के रूप में याद किया जाता है। राजस्थान राजपूत समाज संघ हुब्बल्ली एवं राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संयुक्त तत्वावधान में यहां राष्ट्र नायक वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती महोत्सव पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने यह बात कही। वीर दुर्गादास राठौड़ की 385 वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। वीर दुर्गादास अमर रहे के जयकारों के बीच वीर दुर्गादास की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्गो पर चलने का आह्वान किया। राजस्थान राजपूत समाज संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वीर दुर्गादास राठौड़ हमारे आदर्श हैं। उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बताए मार्ग पर चलें। प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोकसिंह राजपुरोहित ने वीर दुर्गादास राठौड की जीवनी के बारे में प्रकाश डाला।
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वीरों की भूमि है भारत
भारत भूमि में हमेशा से वीरों की कमी नहीं रही है। राजपूतों की बहादुरी के किस्से पूरे राजस्थान की आन-बान-शान हैं। इन्हीं वीरों में से दुर्गादास राठौड़ भी थे, जिन्होंने औरंगजेब की नाक में दम दिया। उन्होंने न सिर्फ मुगलों को कई बार धूल चटाई, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ में संधि करवा कर हिंदू एकता पर भी बल दिया। ेवे मारवाड़ के सेनापति थे। वहां के राजा अजीत सिंह के संरक्षण का जिम्मा भी उन्होंने ही उठाया था।
- पर्बतसिंह खींची वरिया, अध्यक्ष, राजस्थान राजपूत समाज संघ हुब्बल्ली।
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अंतिम समय में महाकाल की धरती पर
अपने अंतिम समय में वीर दुर्गादास मध्य प्रदेश में भगवान महाकाल की धरती पर निकल गए थे। उन्होंने अपने राजा जसवंत सिंह से एक वादा किया था, जिसे निभाने के बाद उन्होंने अंत समय में निश्चिंत होकर ईश्वर की शरण ली। 1988 में उनके सम्मान में भारत सरकार ने स्टांप जारी किए। वहीं अगस्त 2003 में उनके सम्मान में सिक्का भी जारी किया।
- रिड़मलसिंह सोलंकी सिवाना, सचिव, राजस्थान राजपूत समाज संघ हुब्बल्ली।
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महापुरुषों से लें प्रेरणा
आज के समय में हमें संस्कारों से जुड़कर अपने समाज और देश को आगे बढ़ाना है। हमारे पूर्वजों ने कष्ट कहते हुए भी कभी समाज का मान कम नहीं होने दिया। इस धरा की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। ऐसे महापुरुषों से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत है।
- खेतसिंह राठौड़, सान्दन निवासी।
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अब फिर से निखरेगा गढ़ सिवाना
दुर्गादास राठौड़ सहनशील पराक्रमी योद्धा थे। वे गढ़ सिवाना में भी रूके थे। अब गढ़ सिवाना के लिए जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह ने ढाई करोड़ की राशि से जिर्णोद्वार का निर्णय लिया है. वीर दुर्गादास का जन्म 13 अगस्त 1638 में मारवाड़ राज्य के सालवा गांव में हुआ। माता नेतकुंवर पिता आसकरण की ही तरह उनमें भी बाल्यकाल से ही वीरता व अदम्य साहस भरा था।
- गुलाबसिंह राठौड़, नौसर निवासी
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सीख लेने की जरूरत
युवा वीर दुर्गादास राठौड़ के बताए मार्ग पर चलें। हमारे पुरखे शौर्य एवं पराक्रम के पर्याय रहे है। हमें उनसे सीखने की जरूरत है।
- हेमसिंह राठौड़, नौसर निवासी।
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स्वामिभक्त एवं राष्ट्रभक्त
वीर दुर्गादास राठौड़ स्वामिभक्त एवं राष्ट्रभक्त थे। वीर दुर्गादास ने देशभक्ति के लिए कुर्बानी दी। वीर शिरोमणि दुर्गादास प्रत्येक व्यक्ति के लिए आस्था के प्रतीक है। वीर दुर्गादास जैसे वीरों का स्मरण समय-समय पर करते रहने से समाज को नई दिशा मिलती है।
- नरपतसिंह बालौत, पंचानवा निवासी।
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वीरता एवं बलिदान के प्रतीक
राठौड़ की स्वामिभक्ति, वीरता एवं बलिदान सदैव याद किए जाएंगे। वीर पुरुषों के पदचिन्हों का अनुसरण करके ही हम अपने जीवन को कामयाब कर सकते हैं।
- अरविन्दसिंह भायल, देवन्दी निवासी।
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दक्षिण भारत में छिप कर अजीत सिंह की रक्षा की
सन् 1681 से लेकर 1687 तक दुर्गादास राठौड़ ने दक्षिण भारत में छिप कर अजीत सिंह की रक्षा की और उनके युवा होने पर उन्हें वापस लेकर लौटे। साल 1702 में औरंगजेब ने गुजरात के शासक को दुर्गादास राठौड़ की हत्या कराने का आदेश जारी कर दिया। दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ लौट कर लगातार औरंगजेब के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व करते रहे।
- खुमानसिंह भायल, पादरड़ी कला निवासी।
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वीरों के स्मरण से समाज को नई दिशा
वीरों के स्मरण से समाज को नई दिशा मिलती है। किसी भी ताकत से भयभीत नहीं होने वाले वीर दुर्गादास राठौड़ का स्मरण करना ही उनके प्रति सच्ची सद्भावना है।
- दौलतसिंह राठौड़, भिंयाड़ निवासी।
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सकारात्मक प्रेरणा का संचार
ऐसे आयोजनों से जन-जन में सकारात्मक प्रेरणा का संचार होता है।
- राजूसिंह खींची, कुसीप निवासी।
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धैर्य व साहस से काम लें
हमें किसी भी कठिन परिस्थिति में धैर्य व साहस से काम लेना चाहिए। गीता में शौर्य, तेज,धैर्य आदि इन सब गुणों को जीवन में ढालने के लिए अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है।
- भवानीसिंह राठौड़, डंडाली।
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Published on:
13 Aug 2023 09:31 pm
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