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नालों पर तटबंध निर्माण से बढ़ी जलसुरक्षा, किसानों में उत्साह

अमताड़ी ग्राम पंचायत की सीमा में बहने वाले छोटे-छोटे नालों में तटबंध निर्माण के काम ने गांव की जलसुरक्षा को नया आधार दिया है। पिछले तीन वर्षों में कुल दस स्थानों पर तटबंध बनाने की योजना तैयार की गई थी, जिनमें से दो स्थानों—केडगे कट्टा और बन्नीमार कट्टा—पर कार्य पूरा कर पानी इक_ा करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल सिंचाई सरल हुई है, बल्कि कुओं और तालाबों का जलस्तर भी बढ़ा है। यह तटबंध निर्माण की परंपरा कोई नई नहीं है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि लगभग सौ वर्ष पहले किसान अपने खेतों के पास बहते पानी को संजोने के लिए नालों में पत्ते, मिट्टी और लकड़ी डालकर पानी रोकते थे। यह व्यवस्था इतनी प्रभावी थी कि सुपारी और धान के खेतों को आवश्यक पानी आसानी से मिलता था। समय बदला, खेती के तरीके बदले, लेकिन जलसंरक्षण की यह पुरानी समझ आज फिर जीवित हो रही है।

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तटबंध निर्माण

तटबंध निर्माण

अमताड़ी ग्राम पंचायत की सीमा में बहने वाले छोटे-छोटे नालों में तटबंध निर्माण के काम ने गांव की जलसुरक्षा को नया आधार दिया है। पिछले तीन वर्षों में कुल दस स्थानों पर तटबंध बनाने की योजना तैयार की गई थी, जिनमें से दो स्थानों—केडगे कट्टा और बन्नीमार कट्टा—पर कार्य पूरा कर पानी इक_ा करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल सिंचाई सरल हुई है, बल्कि कुओं और तालाबों का जलस्तर भी बढ़ा है। यह तटबंध निर्माण की परंपरा कोई नई नहीं है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि लगभग सौ वर्ष पहले किसान अपने खेतों के पास बहते पानी को संजोने के लिए नालों में पत्ते, मिट्टी और लकड़ी डालकर पानी रोकते थे। यह व्यवस्था इतनी प्रभावी थी कि सुपारी और धान के खेतों को आवश्यक पानी आसानी से मिलता था। समय बदला, खेती के तरीके बदले, लेकिन जलसंरक्षण की यह पुरानी समझ आज फिर जीवित हो रही है।

कार्य सस्ती लागत में
पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते जलसंकट ने किसानों को फिर इस परंपरा की ओर लौटने पर मजबूर किया। गांव में हर बारिश के बाद किसान मिलकर पानी बचाने वाली कमिटी का गठन करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध बनाना जितना सरल लगता है, उतना है नहीं। इसके लिए उचित स्थल का चयन, श्रम और सामूहिक प्रयास आवश्यक है। लेकिन सामुदायिक सहयोग से यह कार्य सस्ती लागत में हो जाता है और इसका लाभ पूरे गांव को मिलता है। किसानों ने बताया कि पानी रुकने से खेतों की उत्पादकता बढ़ी है और गर्मियों में भी जल उपलब्धता बनी रहती है।

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