
निधि जैन
बचपन से कला के प्रति समर्पण
निधि का कला के प्रति समर्पण बचपन से रहा है। निधि ने भगवान राम के शांत, तेजस्वी और दिव्य स्वरूप को अपनी कल्पनाशीलता और कुशलता के साथ रंगों में पिरोया है। पेंटिंग में भगवान राम को धनुष-बाण के साथ दर्शाया गया है। उनके चेहरे पर करुणा और पराक्रम का सुंदर संगम देखने को मिलता है। निसंदेह यह एक भावनात्मक गहराई और तकनीकी उत्कृष्टता का संगम है।
राम के जीवन से मिलती हैं प्रेरणा
राजस्थान मूल की हुब्बल्ली प्रवासी निधि जैन ने बताया, राम की पेंटिंंग बनाने से पहले मैंने भगवान राम के बारे में कई आलेख पढ़े ताकि इसे और अधिक सुन्दर और जीवंत बना सकूं। आलेख पढऩे के बाद वे भगवान राम के आदर्शों से बहुत प्रभावित हुई। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उनकी जीवन यात्रा हमें धैर्य, त्याग और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देती है। मैंने इस पेंटिंग के माध्यम से उन्हीं मूल्यों को व्यक्त करने की कोशिश की है। इस यात्रा में मेरी माता गुडिय़ा जैन ने मेरा पूरा साथ दिया और हर जगह मोटिवेट किया। इससे मेरा हौसला बढ़ता गया। निधि की माता गुडिय़ा जैन ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और कहा, हमारे लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि मेरी बिटिया ने इतनी गहराई और सृजनात्मकता के साथ भारतीय संस्कृति को दर्शाया है।
कोरोना काल के बाद बढ़ा पेंटिंग की तरफ झुकाव
निधि कहती हैं, कोरोना काल के समय जब पढ़ाई ऑनलाइन हुई तो मेरा अधिकांश समय घर पर बीत रहा था। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के बाद जब समय बचता तो मैं पेंटिंग बनाने लगती। कोरोना काल के बाद मैंने पहली पेंटिंग प्रकृति पर आधारित बनाई जिसमें उगते सूरज को दर्शाया गया था जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस पेंटिंग की मुझे जब खूब सराहना मिली तो मेरा उत्साह बढ़ता गया। निधि विभिन्न प्रदर्शनियों में भी अपनी पेटिंग लगा चुकी है। पेंटिंग के क्षेत्र में वे कई पुरस्कार भी हासिल कर चुकी है। पिछले दिनों राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली संस्करण के बीसवें स्थापना दिवस पर भी निधि जैन का राजस्थान पत्रिका की ओर से सम्मान किया गया।
Published on:
06 Apr 2025 07:42 pm
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