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देखरेख के अभाव में लाखों रुपए की लागत से निर्मित उद्यान बदहाल, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

नगर पंचायत परिषद की उदासीनता और ढुलमुल रवैया के चलते रायपुर रोड स्थित व पुराना गुरुवार बाजार समीप स्थित लाखों रुपए की लागत से बनाया गया उद्यान अब अनदेखी से गंदगी, दुर्दशा व टूट-फूट की भेंट चढ़ चुका है। बच्चों, बुजुर्ग और आम नागरिकों की खुशी नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने छीन ली।

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देखरेख के अभाव में लाखों रुपए की लागत से निर्मित उद्यान बदहाल, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

देखरेख के अभाव में लाखों रुपए की लागत से निर्मित उद्यान बदहाल, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

खरोरा। नगर पंचायत परिषद की उदासीनता और ढुलमुल रवैया के चलते रायपुर रोड स्थित व पुराना गुरुवार बाजार समीप स्थित लाखों रुपए की लागत से बनाया गया उद्यान अब अनदेखी से गंदगी, दुर्दशा व टूट-फूट की भेंट चढ़ चुका है। बच्चों, बुजुर्ग और आम नागरिकों की खुशी नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने छीन ली। अधिकारी दफ्तर तक ही सीमित रह गए है। नगर में लोगों के लिए बनाया गया यह पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उद्यान के भीतर बच्चों के खेलने के लिए बनाए गए फिसलपट्टी भी टूट गई है। वहीं, दूसरी तरफ गंदगी का आलम है। न ही लाइट की व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए कुर्सी लगाई गई है। फव्वारा भी सालों से बंद पड़ा हुआ है और मोटर भी खराब हो गया है। गार्डन आने वाले बच्चों को मनोरंजन के लिए झूला भी नसीब नहीं हो रहा है। अव्यवस्था के चलते लोगों का यहां आना बंद सा हो गया है।
उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक वातावरण, फव्वारों की सुंदरता, पेड़ पौधों से आच्छादित गार्डन की वादियां। ऐसा नजारा नगर के गार्डन में कभी आम हुआ करता था। आज यहां की स्थिति बदहाल हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पार्क की खूबसूरती को शराबप्रेमी पूरा कर रहे हैं। अनदेखी से असामाजिक तत्वों और शराबियों का अड्डा बनता जा रहा है। गार्डन में जगह-जगह बोतलें, कचरा, प्लास्टिक बोतलें, पैकेट गवाही दे रहे हैं।
यहां शराबियों का जमावड़ा लगा रहे से आमजन ने किनारा कर लिया है। इतना सब होने के बावजूद अधिकारी आंख बंद कर बैठे हुए हैं। प्रतिदिन आने जाने वाले नगरवासियों की संख्या में भी कमी होती नजर आ रही है। लोगों ने बताया कि नगर पंचायत प्रशासन कर्मचारी नियुक्त कर रखा है लेकिन इनके ध्यान नहीं देने से असामाजिक तत्वों पर लगाम नहीं लग पा रहे हैं। वहीं अधिकारी भी इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ कर बैठे हैं।

मनोरंजन के साधन टूट-फूट गए हैं
पहले छुट्टियों का मौसम में इस उद्यान में छोटे बच्चों की किलकारियां दूर-दूर तक सुनाई देती थी और अब यहां पर मनोरंजन के सभी साधन टूट कर बर्बाद हो गए हैं। यहां छोटे बच्चों का मनोरंजन के लिए फिसलपट्टी, झूले, फव्वारे भी लगाए गए थे। यह सब महंगी साम्रगी टूट कर बिखर गई है।
सफाई व्यवस्था बदहाल
लोग दिनभर की भागदौड़ के बाद गार्डन में लोग ताजा हवा का आनंद लेने अपने बच्चों व परिवार के साथ आते हैं। मगर जब यहां जगह-जगह कूड़े के ढेर मिलते हैं तो लोग नगर परिषद के उदासीन रवैए को लेकर अपनी नाराजगी भी जताते हैं।
कचरों का ढेर
सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन पार्क परिसर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर नगर परिषद के दावों की पोल खोल कर रख रहे हैं।

फव्वारे बने शोपीस
लाखों खर्च कर गार्डन में शाम की सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किए हैं रंगीन फव्वारे अनदेखी के चलते गंदगी और कचरे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। पार्क की सुंदरता को बढ़ावा देने के लिए वैसे तो कई प्रकार की प्रजातियों के पौधे लगाए हैं, लेकिन उचित देखभाल और पानी की कमी की वजह से मुरझा कर दम तोड़ते जा रहे हैं।
अव्यवस्था से लोगों में आक्रोश
गार्डन के रखरखाव के प्रति भी पंचायत प्रशासन गंभीर नहीं है। इसके चलते गार्डन की सुंदरता खत्म होने जा रही है। सालों से कोई पौधारोपण भी नहीं किया गया है। उद्यान पहुंचे बच्चे राहुल पंकज ने बताया कि उद्यान के भीतर बच्चों के लिए बनाए गए फिसलपट्टी जर्जर हो गई है। जो झूला है उसमें झूलने के लिए कुछ भी नहीं लगा हुआ है। यहां पर कीड़े-मकोड़े घूमते रहते है। ऐसे में हम खेलें तो कहां खेलें।