
CG Ration: राजधानी के उचित मूल्य की राशन दुकानों में बीपीएल कोटे के चावल उपलब्ध नहीं है। इसके कारण बीपीएल कार्डधारकों को राशन दुकानों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। वहीं, चावल नहीं मिलने की मुख्य वजह छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम (नान) रायपुर के गुढ़ियारी एवं मंदिर हसौद में खपत के अनुसार बीपीएल चावल का स्टॉक की कमी होना है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चालू महीने में लगभग 20 हजार क्विंटल बीपीएल कोटे का चावल बांटा जाना है, लेकिन नान के गुढ़ियारी एवं मंदिर हसौद स्थित गोदाम में सिर्फ 7 हजार क्विंटल बीपीएल चावल का ही स्टॉक बचा है। इसके कारण राशन दुकानों में चावल का भंडारण नहीं हो रहा है। इसके विपरीत एपीएल चावल का स्टॉक लगातार भेजा जा रहा है। इस बारे में डीएम नान अल्का शुक्ला को फोन पर कॉन्टेंक्ट करने की कोशिश की गई, पर उन्होंने जवाब नहीं दिया।
सिर्फ 11 दिन बचे, इसमें भी दो दिन छुट्टी
कई दुकान संचालकों ने बताया कि भंडारण के लिए नान को डिमांड किए कई दिन हो चुके हैं। इसके बाद भी चावल का भंडारण नहीं किया जा रहा है। जबकि चालू माह को खत्म होने में सिर्फ 11 दिन ही शेष बचे हैं। इसमें भी दो दिन छुट्टी के चले जाएंगे। इस तरह 9 दिनों में ही उन्हें शेष हितग्राहियों को चावल वितरण करना है। अगर समय पर चावल का भंडारण नहीं किया गया तो कई हितग्राहियों को इस महीने चावल से वंचित भी होना पड़ सकता है। क्योंकि महीना खत्म होने के बाद उस माह का राशन बांटने का ऑप्शन ही साफ्टवेयर में नहीं हैं।
अतिरिक्त प्रभार का बड़ा असर पड़ रहा राजधानी में
अतिरिक्त प्रभार का बड़ा असर राजधानी को भुगतना पड़ा रहा है। क्योंकि राजधानी होने के बावजूद जिले के नागरिक आपूर्ति निगम में पिछले सालभर से अतिरिक्त प्रभार के रूप में अफसरों को कमान सौंपे जाने के कारण भी राशन दुकानों में खाद्यान्न सामग्रियों के भंडारण में कहीं न कहीं असर देखने को मिल रहा है। वहीं, वर्तमान में नान रायपुर की जिम्मेदारी डीएम अलका शुक्ला को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपा गया है, जबकि वह बेमेतरा जिला में नान का दायित्व भी संभाल रही हैं। अलका शुक्ला के पहले महासमुंद के नान डीएम को अतिरिक्त प्रभार के रूप में रायपुर नान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल में भी राशन दुकानों में भंडारण की समस्या बनी हुई थी, जो अभी भी बनी हुई है।
वर्जन
भंडारण समय पर नहीं होने से दुकान संचालकों को उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है। साथ ही अधिकारियों द्वारा भी प्रताडि़त किया जाता है।
Updated on:
20 Jan 2026 01:33 am
Published on:
20 Jan 2026 01:33 am
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