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वेबसीरीज एस्पिरेंट्स से अक्षय को मिला मोटिवेशन, चौथे प्रयास में एआईआर 51

आईएएस रेणु पिल्लै और आईपीएस संजय पिल्लै के बेटे को ऐसे मिली कामयाबी

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45वीं रैंकर श्रद्धा बोलीं- दीवार पर लिखती थी अंडर 50, जानिए स्ट्रेटजी

देवेंद्र नगर स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी में अक्षय पिल्लै।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.देश की कठिनतम परीक्षाओं में शुमार यूपीएससी क्रैक करना युवाओं के लिए एक सपने की तरह होता है। जब वे सफल हो जाते हैं तो दूसरों के लिए मिसाल बनते हैं। एआईआर 51 हासिल करने वाले देवेंद्र नगर निवासी अक्षय पिल्लै ने बताया कि जब मैंने एनआईटी ज्वाइन किया तो पहले साल में मेरा फोकस कम था। अगले साल मैंने इंप्रूव किया तब सोचा कि यह भी ऑप्शनल सब्जेक्ट हो सकता है। इंटरव्यू में मेरी हॉबी से रिलेटेड सवाल भी पूछे गए। मैं फुटबॉल को फॉलो करता हूं। इस पर उनका सवाल था कि दिसम्बर में कतर में वल्र्ड कप होने वाला है। इसमें क्या कॉन्ट्रोवर्सी है। मैंने बताया कि माइग्रेट वर्कर्स का शोषण हो रहा है। पहले तीन अटेम्प्ट में मैंने सेल्फ स्टडी की थी। एनसीईआरटी और ऑनलाइन सोर्सेस से पढ़ा। चौथे प्रयास में मुझे लगा कि कुछ और करना चाहिए। एक कोचिंग सेंटर से ऑनलाइन क्लास ली। तीसरी कोशिश में मैं इंटरव्यू तक पहुंचा लेकिन दो नंबर से चूक गया। वह पल मेरे लिए काफी निराशाजनक रहा। घर वालों ने हिम्मत बंधाई। एक और कोशिश के लिए पुश किया। इसके अलावा मैंने एस्पिरेंट्स वेबसीरीज देखी। उसमें एक किरदार से प्रेरित हुआ था। मेरे नाना और मम्मी आईएएस रहे हैं। हालांकि मैंने इंजीनियरिंग के तीसरे साल में तय किया कि मुझे भी आईएएस बनना है। इससे पहले 12वीं में सोचता जरूर था। चूंकि मैंने मैकेनिकल में इंजीनियरिंग की इसलिए यूपीएससी में भी यही सब्जेक्ट रखा। मैंने पढ़ाई हमेशा क्वालिटी टाइम में की है। कभी घंटों पर फोकस नहीं किया। इंटरव्यू में कई सवाल छत्तीसगढ़ से जुड़े थे। इसमें मिनिरल्स और पीडीएस के सवाल पूछे गए। मैंने बैडमिंटन स्टेट लेवल पर खेला है। मुझसे इंडियन टीम की रैंकिंग को लेकर सवाल पूछा गया।

पूरा हो गया दादाजी का सपना

एआईआर 45 प्राप्त करने वाली रायपुर की श्रद्धा शुक्ला ने कालीबाड़ी स्थित डिग्री गल्र्स कॉलेज से यूजी और पीजी किया। वे बताती हैं, मैंने यूपीएससी की तैयारी भी रायुपर में रहकर की। मुझे दादाजी ने यूपीएससी से इंट्रोड्यूज कराया। उनका सपना था कि मैं आईएएस बनूं। मेरा इंटरव्यू 17 मई को हुआ जिसमें इंटरनेशनल रिलेशंस और ओपेनियन बेस्ड सवाल थे। आईएएस क्यों बनना चाहती हैं इस सवाल पर मैंने कहा कि मैं चाहती हूं कि मेरा पोटेंशियल पूरी तरह यूटिलाइज्ड हो। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो मुझे अपॉर्चुनिटी देगा जिसमें मेरा पोटेंशियल यूज हो पाए। तैयारी के दौरान मैं जहां भी पढ़ती थी वहां दीवारों पर कागज चिपका देती थी जिसमें लिखा होता था-एआईआर अंडर 50, और मैंने तीसरे प्रयास में इसे अचीव कर लिया। मेरी स्ट्रेटजी सिंपल रही। मेंस में आंसर राइटिंग में ध्यान दें। बेसिक्स पर फोकस रहें। वे कहती हैं कि रायपुर में तैयारी के लिए अच्छा माहौल है। मैं चाहती हूं कि यहां के लोग बाहर जाकर तैयारी न करें बल्कि बाहर के लिए यहां आकर पढ़ें।

इंटरव्यू में नक्सली समस्या पर पूछा सवाल

स्टेशन पारा निवासी प्रतीक अग्रवाल को एआईआर 156 मिली है। खास बात ये है कि उन्हें इंटरव्यू में 275 में 195 माक्र्स मिले हैं। वे कहते हैं यह मेरा दूसरा प्रयास था। आईपीएस मिल सकता लेकिन मैं आईएएस ही बनना चाहता हूं। मुझे एजुकेशन से बहुत लगाव है। आगे मैं फिर से कोशिश करूंगा। मैंने बिट्स पिलानी से सिविल इंजीनियरिंग की है। तभी मुझे रियलाइज हुआ कि यूपीएससी क्रेक करना है। प्लेसमेंट जॉब छोड़कर मैंने यूपीएससी की तैयारी की। इंटरव्यू में हायर एजुकेशन में परेशानी को कैसे दूर करोगे के सवाल पर मेरा जवाब था कि नई शिक्षा नीति में कई ऐसी बातें हैं जिसे फॉलो कर हम बेहतर कर सकते हैं। मुझसे पूछा गया कि एजुकेशन सेक्रेटरी बनाने पर स्कूलों की दर्ज संख्या कैसे बढ़ाओगे। इस पर मैंने कहा कि ट्राइबल इलाकों में लोकल लैंग्वेज में पढ़ाई करानी चाहिए तो वे अच्छे से पढ़ सकेंगे। नक्सली समस्या हटाने के सवाल पर मैंने कहा कि वहां सोशल और इकोनॉमी परेशानी है जिसके लिए जरूरी- बेसिक सोशल डेवलपमेंट हो। हैल्थ और एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधरे, जिससे कि उनमें केपेबिलिटी डेवलप हो सके।