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देवास की 200 करोड़ की जमीन नियम विरुद्ध तरीके से किया नीलाम, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

- एस. कुमार कंपनी की देनदारियां चुकाने के लिए नीलाम की गई जमीन - 1948 में उद्योग चलाने के लिए लीज पर दी गई थी 57 एकड़ जमीन - 1600 करोड़ की देनदारियों का उल्लेख है दायर जनहित याचिका में

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देवास की 200 करोड़ की जमीन नियम विरुद्ध तरीके से किया नीलाम, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

देवास की 200 करोड़ की जमीन नियम विरुद्ध तरीके से किया नीलाम, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

इंदौर. देवास में एबी रोड से लगी 57 एकड़ जमीन को नियम विरुद्ध नीलाम करने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा। जमीन का बाजार मूल्य करीब 200 करोड़ रुपए होने का दावा किया है, जिसे नियम विरुद्ध 40 करोड़ में नीलाम करने की जानकारी हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका के माध्यम से दी है। यह 57 एकड़ वहीं जमीन है, जिस पर एस. कुमार कंपनी संचालित होती है। जस्टिस सुजोय पॉल और जस्टिस प्रणय वर्मा की युगल पीठ में याचिका पर सुनवाई नियत थी, लेकिन कोर्ट ने तीन जनवरी को याचिका पर सुनवाई के आदेश दिए हैं। आरोप है, यह जमीन उद्योग चलाने के लिए लीज पर दी गई थी। उद्योग नहीं चलने की दिशा में जमीन वापस सरकार को सौंपी जानी थी, लेकिन कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए उसे नियमविरुद्ध तरीके से ग्वालियर की कंपनी को बेच दिया गया। याचिका के माध्यम से उक्त जमीन वापस सरकार को दिलाने की मांग के साथ ही गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।1948 में लीज पर दी गई थी जमीन एडवोकेट प्रतीक माहेश्वरी के माध्यम से देवास के कमल पटेल ने याचिका दायर की है। माहेश्वरी ने बताया, 11 नवंबर 1948 में सरकार ने करीब 57 एकड़ जमीन महारानी महाल्मा बाई कॉटन मिल्स लिमिटेड को उद्योग संचालित करने के लिए लीज पर दी थी। शर्तों के मुताबिक जब तक जमीन पर उद्योग चलेगा तब तक जमीन उनकी रहेगी, फैक्ट्री बंद होने पर जमीन वापस सरकार को मिल जाएगी। नियमों को ताक पर रखकर 1957, 1960 और 1998 में यह जमीन अलग-अलग कंपनियों को हस्तांतरित की गई। वर्ष 2000 से एस. कुमार कंपनी यहां संचालित हो रही थी। आर्थिक नुकसान के चलते 2019 में एस. कुमार कंपनी बंद हो गई। माहेश्वीर ने बताया, कंपनी पर करीब 1600 करोड़ से अधिक की देनदारी थी। कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल भी पहुंचा मामला माहेश्वरी ने बताया, एस.कुमार कंपनी के 2019 में बंद होने के बाद उसका दीवाला निकला और मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल पहुंचा था। देनदारियां चुकाने के लिए एनसीएलटी ने ओमप्रकाश अग्रवाल को ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्ति किया था। जमीन लीज शर्तों के मुताबिक उद्योग बंद होने पर सरकार की होना थी। बावजूद इसके कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए अग्रवाल ने जमीन करीब 40 करोड़ में जून 2021 में नीलामकर दिया। ग्वालियर की आगरा पाथ वे कंपनी ने उसे खरीदा है। याचिका में सवाल उठाया है गया कि कंपनी के कर्ज चुकाने के लिए सरकारी जमीन कैसे बेची जा सकती है।