
सुपर कॉरिडोर पर 300 करोड़ की 25 मंजिला इमारत की फिर खुली राह
इंदौर. सुपर कॉरिडोर पर एक बार फिर कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ाने के लिए 25 मंजिला हाईराइज प्रोजेक्ट की फाइल फिर से खुली है। 300 करोड़ रुपए लागत के इस प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी) आधार पर बनवाने की कवायद होगी। आईडीए का मानना है कि मेडिकल हब, फिनटेक सिटी प्रोजेक्ट सफल नहीं होने पर तैयार यह प्रोजेक्ट कॉरिडोर को विकसित करने के लिए जरूरी है।
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एक साल पहले सुपर कॉरिडोर के विकास को प्राथमिकता में रखते हुए इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने यहां प्रदेश की सबसे बड़ी हाईराइज बनाने की कल्पना संजोई थी। 300 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की जोर-शोर से तैयारी भी की, लेकिन फरवरी में सरकार बदलते ही राशि का अभाव बताते हुए इससे हाथ खींच लिए। इसके बाद कॉरिडोर पर नए सिरे से विकास की रणनीति बनाई, लेकिन अपेक्षित निवेशक नहीं मिले। आईडीए सीईओ विवेक श्रोत्रिय का कहना है कि कॉरिडोर पर मेट्रो प्रोजेक्ट की हलचल के बाद पूछताछ तो बढ़ी हैं। निजी लोगों को अनुबंध के तहत दिए जाने वाले प्लॉटों का आवंटन भी लगभग पूरा हो चुका है। विकास कार्य भी हो गए हैं। पानी-बिजली की भी व्यवस्था कर दी गई हैं। इसके बाद भी बड़े कमर्शियल प्लॉट पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है। आईडीए ने भी कुछ प्लॉट बेचने के प्रयास किए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। सिर्फ आईटी कंपनियों के लिए आईटी नीति के तहत उपलब्ध कराए प्लॉट बिक सके। इसे देखते हुए हाईराइज प्रोजेक्ट को बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि यहां गतिविधियां बढ़ सकें।
हाईराइज की खासियत
- ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर बनेगी इमारत, सोलर एनर्जी का उपयोग किया जाएगा।
- 3 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण।
- 230 फीट ऊची और 25 मंजिला इमारत में करीब 7.5 लाख वर्गफीट निर्माण होगा।
- तल घर व भूतल के ऊपर की तीन मंजिलों में केवल पार्किंग।
- 20 मंजिलों पर कमर्शियल उपयोग होगा। इसमें माल, आईटी, फाइनेंस और कमर्शियल फर्म के लिए जगह बनाई जाएगी।
- भूतल पर बैंक, चौथी मंजिल पर जिम और रिक्रिएशन सेंटर बनेगा।
- पांचवी मंजिल फूड फ्लोर होगी। इस पर कैफे व फाइव स्टार होटल बनेगा।
- 19 वीं और 21 वीं मंजिल सर्विस फ्लोर होगी।
- अगले 6 माह में शुरू होगा काम और 2 साल में प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा।
बांड से राशि जुटाने की थी योजना
मुंबई स्टॉक एक्चेंज में नगर निगम द्वारा घंटी बजाने के बाद आईडीए ने भी 500 करोड़ रु. के बांड जारी करने का निर्णय लिया था। इसके लिए क्रेडिट रेंटिंग भी कराई जाना थी। इस राशि में से 300 करोड़ की राशि हाईराइज के लिए उपयोग होना थी। योजना पर सवाल उठने पर इसे वापस ले लिया गया।
Published on:
30 Aug 2019 03:22 pm
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