
इंदौर में रंगपंचमी पर जब पूरा शहर रंगों की मस्ती में डूबा है। इस बीच शहर के तीन लोगों के जीवन में रंग भरे जाने की तैयारी चल रही है। शनिवार को शहर में 54वां ग्रीन कॉरिडोर बना है। शहर के राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ विज्ञानी श्रीरामुलु कंजेटी तीन लोगों के जीवन में नया रंग भरने जा रहे हैं। श्रीरामुलु कंजेटी ब्रेनडेथ हो चुके थे, जिसकी जानकारी डॉक्टरों ने उनके परिजनों को दी और उनसे अंगदान के लिए अनुरोध किया। जिसके लिए श्रीरामुलु कंजेटी की बेटी औऱ पारिवारिक मित्रों ने भी जागरुकता दिखाई। इसके बाद अंगदान के लिए व्यवस्थाएं जुटाना शुरू की।
तीन लोगों को मिलेगी नई जिंदगी
विज्ञानी कंजेटी की एक किडनी जुपिटर विशेष हॉस्पिटल में महिला मरीज को, दूसरी चोइथराम हॉस्पिटल में पुरुष मरीज को और लिवर शैल्बी अस्पताल में भर्ती मरीज को दिया जाएगा। ये तीनों मरीज काफी लंबे समय से बीमारियों से ग्रसित हैं। जिसके लिए आज रंगपंचमी पर इंदौर का 54 वां ग्रीन कॉरीडोर बना है।
एमपी के 80 अंगदान इंदौर में होते हैं। इंदौर के नौ हॉस्पिटल में अंगों को दान करने की सुविधा है। जहां काफी उच्च क्वालिटी की तकनीकी है। इंदौर त्वचा दान के लिए देश में दूसरे नंबर पर है।
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद एक व्यक्ति के अंगदान से कम से कम आठ लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति जरूरी है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, गर्भाशय, अंडाशय, चेहरा, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वॉल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं।
कुछ कैंसर व डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति अंगदान कर सकते हैं। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति अंगदान नहीं कर सकते।
Updated on:
30 Mar 2024 05:36 pm
Published on:
30 Mar 2024 05:35 pm
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