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7 किमी का रोड 55 खतरनाक मोड़

दुर्घटना का हमेशा रहता है अंदेशा, झाडिय़ों के कारण नहीं दिखते वाहन

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बदनावर. कोद-बखतगढ़ मार्ग पर अंधे मोड़ होने से हादसों का अंदेशा बना रहता है। बदनावर से बखतगढ़ की 7 किमी दूरी में ही 55 से अधिक खतरनाक मोड़ है। यह मार्ग सिंगल लेन है। अनेक जगहों पर मोड़ के साइड में घनी झाडिय़ां पनपने से सामने से आने वाला वाहन नजर नहीं आता है और हादसे हो जाते हैं। रोड से मांगलिया, रेशमगारा, गाजनोद, बिड़वाल, दसाई, कड़ोद, खिलेड़ी, शेरगढ़, झरीपाड़ा, जलोद खेता सहित कईगांव जुड़े होने के कारण आवागमन का दबाव बना रहता है। ग्रामीण अंचल के लोग अधिकांश बाइक से ही आना-जाना करते हंै। प्रधानमंत्री सडक़ के साइड सोल्डर दबे होने से अंधे मोड़ पर वाहन टर्न करते समय संतुलन बिगडऩे से भी अनेक घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अंधे मोड़ के पास झाडिय़ों को हटवाना चाहिए। जगह भी पर्याप्त होने से रोड को भी सीधे किए जा सकते हंै।
बेधडक़ गुजर रहे भारी वाहन
प्रधानमंत्री सडक़ से भारी वाहनों के गुजरने पर पाबंदी के बावजूद बेधडक़ गुजरने से रोड की हालत खस्ता हो रही है। उपज से भरे वाहन एवं डंपर आदि गुजरने से ओवरटेेक या क्रॉसिंग के दौरान वाहनों को रोड से नीचे उतारना पड़ता है, लेकिन सोल्डर दबे होने से वाहन पलटने का भय रहता है। खासकर बाइक सवारों की खासी फजीहत है। पूर्व में झरीपाड़ा के पास डंपर की टक्कर से बाइक पर सवार दादा-पोते की मौके पर ही मौत हो गई थी।
तीन लोगों के निधन से छाई शोक की लहर
झाबुआ. नगर के हवेलीराम छाबड़ा (98 ) का रविवार रात 11 बजे निधन हो गया। इसी प्रकार भूलीबाई जोहरी (करीब 8 0) का रविवार को स्वर्गावास हुआ। इससे एक दिन पूर्व सोनाली नागर (33) का निधन होने पर शहर में लोक की लहर छाई हुई है। निधन पर शहर की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक संस्थाओं के साथ गणमान्य नागरिकों एवं आमजनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।