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छावनी मंडी के लिए राऊ में तलाशी 60 एकड़ जमीन

आधुनिक मंडी बनेगी, शॉपिंग मॉल व बैंकिंग सुविधा भी रहेगी

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इंदौर

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Hussain Ali

Jul 08, 2019

indore

छावनी मंडी के लिए राऊ में तलाशी 60 एकड़ जमीन

इंदौर. प्रशासन ने छावनी अनाज मंडी को शिफ्ट करने के लिए आखिरकार जमीन की तलाश पूरी कर ली है। राऊ तहसील में 60 एकड़ जमीन का सीमांकन करके इसे मंडी उपयोग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। प्रशासन यहां आधुनिक मंडी का निर्माण करेगा। इसके बनने से बीच शहर की यातायात व्यवस्था को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और शहर के बाहर माल की आवाजाही भी आसान होगी।

मध्य शहर में बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव और अनाज की आवक अधिक होने के चलते छावनी अनाज मंडी छोटी पडऩे लगी है। मास्टर प्लान में इसे कैलोद करताल के समीप आरक्षित 23 एकड़ जमीन पर शिफ्ट करने की योजना थी, लेकिन जमीन का उपयोग ग्रीन बेल्ट होने से परेशानी आ रही थी, साथ ही जमीन भी कम थी। अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े ने बताया, इसी जमीन से लगी करीब 40 एकड़ जमीन मोरोद और निहालपुर मुंडी गांव की है। मंडी के लिए अब 63 एकड़ जमीन उपलब्ध हो रही हैं। नई मंडी को कृषि चौपाल की तर्ज पर बनाया जाएगा। यहां पर सभी तरह की उपज खरीदी के काउंटर के साथ ही शॉपिंग मॉल, मल्टी लेवल पार्र्किंग व होलसेल मार्केट भी रहेगा।

100 एकड़ से ज्यादा
मंडी कारोबारी इस जमीन को भी अपर्याप्त बता रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले दिनों कृषि मंत्री के समक्ष चर्चा में मंडी के लिए 100 एकड़ से ज्यादा जमीन की जरूरत बताई थी। वर्तमान में शहर में तीन मंडियां छावनी, लक्ष्मी बाई नगर और चोइथराम हॉस्पिटल के पीछे हैं। कहीं भी पर्याप्त जगह नहीं हैं।

छावनी में बनेगा व्यावसायिक सह
आवासीय कॉम्प्लेक्स

सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन नगर निगम से मांगी थी। इसके बाद आईडीए, हाउसिंग बोर्ड व अन्य से चर्चा की गई कि वे छावनी अनाज मंडी की 17 एकड़ जमीन ले लें और इसके बदले में 100 एकड़ जमीन पर मंडी विकसित कर के दे दें। आइडीए ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि पूर्व में निरंजनपुर में मंडी का निर्माण कर मंडी बोर्ड को दी गई थी। इसकी व जमीन की लागत देने से बोर्ड ने इंकार कर दिया। इसके बाद आईडीए ने इस जमीन का उपयोग व्यावसायिक करवा दिया। अब आइडीए के पास मंडी या व्यावसायिक उपयोग की इतनी जमीन नहीं हैं। प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि छावनी में जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ रुपए है। इस पर आवासीय सह व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना हैं। इससे जो राशि मिलेगी, उसका उपयोग नई मंडी बनाने में किया जाएगा।