14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी के इस शहर में बना 72 साल पुराना ब्रिज टूटेगा, 140 करोड़ में होगा नया निर्माण

Indore Shastri Bridge : 72 साल पुराने लालबहादुर शास्त्री ब्रिज को तोड़कर रेलवे 140 करोड़ खर्च कर नया ब्रिज बनाएगा। नए ब्रिज की चौड़ाई मौजूदा के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा होगी, जबकि ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी।

3 min read
Google source verification
Indore Shastri Bridge

72 साल पुराना शास्त्री ब्रिज टूटकर नया बनेगा (Photo Source- Patrika)

Indore Shastri Bridge :मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित 72 साल पुराने लालबहादुर शास्त्री ब्रिज को तोड़कर इसके स्थान पर रेलवे 140 करोड़ रुपए खर्च कर नया ब्रिज बनाने जा रहा है। नए ब्रिज की चौड़ाई मौजूदा ब्रिज के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा होगी, जबकि ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों ने शास्त्री ब्रिज का दौरा किया। देर शाम सांसद शंकर लालवानी ने अफसरों के साथ बैठक ली।

बैठक के बाद सांसद लालवानी ने बताया कि, ब्रिज निर्माण की लागत तो रेलवे द्वारा वहन की जाएगी, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल आदि मूलभूत व्यवस्थाएं नगर निगम की जिम्मेदारी में रहेंगी। सांसद लालवानी के अनुसार, नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास खत्म होगा। मौजूदा ब्रिज के मुकाबले इसकी लंबाई भी 38 मीटर ज्यादा होगी।

ब्रिज निर्माण के बाद बिछेगा तीसरा ट्रेक

आमतौर पर जब भी किसी रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को दोबारा बनाना होता है तो खर्च स्थानीय निकाय को वहन करता है, लेकिन नया शास्त्री ब्रिज बनने से रेलवे इंदौर से लक्ष्मीबाई नगर तक तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ेगी। यही कारण है कि, रेलवे आरओबी को दोबारा बनाने का खर्च वहन करने को तैयार हुआ है।

निगम तैयार करेगा आर्थिक आंकलन

शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों के शास्त्री ब्रिज के संयुक्त दौरे में इस बात का आकलन किया गया कि नया ब्रिज बनाने की स्थिति में किन-किन सीवेज लाइन, पानी की लाइन और बिजली के पोल की शिफ्टिंग करनी होगी और इस पर कितना खर्चा आएगा। नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि निगम के इंजीनियरों ने रेलवे के इंजीनियरों को लाइनों की ड्राइंग दे दी है। जल्द ही निगम आर्थिक आकलन तैयार कर लेगा।

12 जनवरी 1953 को हुआ था ब्रिज निर्माण

पहले से बने हुए शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसे लोकार्पण किया था। ब्रिज पिछले 72 साल से पूर्व और पश्चिम इंदौर को जोड़ने में अहम किरदार निभा रहा है।

निर्माण के दौरान आएगी दिक्कत

इस ब्रिज से शहर के करीब सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन की भारी परेशानी आएगी। एमजी रोड पर मेट्रो अंडर ग्राउंड प्रस्तावित है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी।

चूहों ने पहुंचाया खासा नुकसान

साल 1953 में जब इस ब्रिज का निर्माण हुआ था, तब ये मध्य भारत का पहला टू-टू लेन रेलवे ओवरब्रिज था। हाल ही में शास्त्री ब्रिज को चूहों ने कुतर दिया था, जिससे नीव में बड़ा गड्ढा हो गया था। रखरखाव के अभाव में ये ब्रिज काफी क्षतिग्रस्त हुआ है। हालांकि, रेलवे ने इसे अब तक अनफिट सुनिश्चिच नहीं किया है।

15 महीने में होगा नए ब्रिज का निर्माण

रेलवे सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने इस ब्रिज को 15 महीने में तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है।

रेलवे वाले हिस्से में नहीं होगा कोई पिलर
नए ब्रिज में रेलवे वाले हिस्से में कोई पिलर नहीं होगा। यही वजह है कि ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है। एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच करीब 60 मीटर की दूरी होगी।

जानें ब्रिज की खास बातें

मौजूदा ब्रिज की लंबाई 400 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 438 मीटर किया जाएगा।
मौजूदा ब्रिज की ऊंचाई 4.7 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 7 मीटर किया जाएगा।
मौजूदा ब्रिज के मुकाबले नए ब्रिज की चौड़ाई भी लगभग डेढ़ गुना बढ़ाई जाएगी।
नए ब्रिज से प्लेटफार्म के कर्व सीधे होंगे, प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी।

नया ब्रिज आर्च टाइप बनेगा

-प्लेटफार्म 01 से 05 और 06 पर जाने के लिए फिलहाल 1.2 मीटर चौड़े कारिडोर से गुजरना पड़ता है, लेकिन नए ब्रिज के निर्माण के बाद ये समस्या खत्म होगी।
-प्लेटफार्म सीधे होने से मालगाड़ियां आसानी से गुजर सकेंगी।
-ब्रिज की ऊंचाई बढ़ने से आरएनटी मार्ग को भी ऊंचा करना होगा।
-रेलवे स्टेशन को मेट्रो से जोड़ने का विकल्प उपलब्ध होगा।