
विकास के नाम पर चढ़ेगी 500 पेड़ों की बलि, साफ हो जाएगा जंगल!
पवन सिंह राठौर @ इंदौर. औद्योगिक विकास के लिए एकेवीएन पीथमपुर के सेक्टर-में विकास कार्य करवाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए हरियाली की कुर्बानी देनी होगी। औद्योगिक विकास के लिए जंगल साफ करने की तैयारी है। हालांकि एकेवीएन का कहना है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसके बदले तीन गुना पौधे लगाए जाएंगे। सवाल यह है कि इन पौधों को बड़ा होने में वर्षों लग जाएंगे। अभी जो जंगल यहां है, उसके पेड़ विशालकाय और फैले हुए हैं।
पीथमपुर सेक्टर-के लिए विकास कार्यों की शुरुआत की जा रही है। करीब 25 करोड़ रुपए इसमें खर्च होंगे और नौ भूखंड यहां निकलेंगे। इन नौ भूखंडों के लिए पांच सौ पेड़ो की बलि ली जाएगी। एकेवीएन ने इसके विकास के लिए जो टेंडर जारी किया, उसमें भी पहला काम पेड़ों को काटने का ही है। हाल ही में विश्व अर्थ दिवस पर बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन इन पेड़ों को बचाने के लिए कोई संस्था या व्यक्ति आगे नहीं आ रहा। एकेवीएन चंद भूखंडों के लिए करीब 68 हेक्टेयर क्षेत्र के जंगल एरिया को खत्म करने की तैयारी में है।
लगाएंगे तीन गुना पेड़
एकेवीएन अफसरों का तर्क है कि विकास के लिए जंगली क्षेत्र को साफ किया जाना जरूरी है। यहां नई व बड़ी औद्योगिक इकाइयां आ सकेंगीं। जो पेड़ काटे जा रहे हैं, उनके बदले में 1500 नए पेड़ लगाने की तैयारी है। भविष्य में यहां और भी ज्यादा हरियाली हो जाएगी।
एक पेड़ के कत्ल की कीमत
एकेवीएन ने टेंडर में ऑफर दिया है कि एक पेड़ को काटने पर 197 रुपए दिए जाएंगे। पांच सौ पेड़ तो काफी बड़े हैं और 30 हेक्टेयर एरिया में फैले हैं। इन पेड़ों के तनों की चौड़ाई ही एक से दो फीट तक है। कुछ की तो और भी ज्यादा। इसके अलावा झाडिय़ां और अन्य छोटे किस्म के भी पेड़ हैं। पूरा क्षेत्र काफी हरा-भरा है, जिसे पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। इन पेड़ों पर कई पंछी-जीवों का बसेरा भी है।
Published on:
04 May 2019 12:58 pm
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