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अनाज मंडी को शिफ्ट करने के व्यापारी तैयार, जानिए नई मंडी से जुड़ीं ख़ास बातें व स्थान

सरकार ने जमीन उपयोग बदलने पर दी सैद्धांतिक सहमति

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mandi

इंदौर. शहर में सुगम ट्रैफिक और व्यापार के लिए पुरानी व्यवस्थाओं को शहर के बाहर करने की योजना के पहले चरण में छावनी अनाज मंडी को मास्टर प्लान में निर्धारित कैलोद-करताल स्थित मसाला मंडी में शिफ्ट किया जाएगा। सरकार ने कलेक्टर द्वारा मास्टर प्लान में चिह्नित करीब 60 एकड़ जमीन का उपयोग मंडी के लिए करने पर सहमति जताते हुए टीएंडसीपी और नगर निगम से एनओसी देने के लिए कहा है।

सरकार की इस पहल से व्यापारी भी सहमत हैं, लेकिन मौजूदा जमीन वापसी को लेकर पेंच फंसने की आशंका है, क्योंकि यह मंडी व्यापारी संघ ने खरीदकर मंडी समिति को 1 रुपए में दी है। कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कहा, मंडी निर्माण का प्लान तैयार हो रहा है। जमीन उपयोग बदलने पर सहमति से प्रक्रिया शुरू की है।


स्मार्ट बिजनेस सेंटर बनाने की कवायद
स्मार्ट हो रहे मध्य शहर को स्मार्ट बिजनेस सेंटर बनाने की कवायद हो रही है। सघन बाजारों से थोक कारोबार नए प्रस्तावित स्थलों पर भेजा जा रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही भी दिन में प्रतिबंधित की जा रही है। कारोबारी भी मंडी कैलोद करताल ले जाने के प्रयास में जुट गए हैं।

सोमवार को प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिलकर जमीन का उपयोग बदलने पर चर्चा के बाद प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। नगरीय आवास और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव ने नगर व ग्राम निवेश विभाग को जमीन का उपयोग बदलने के लिए प्रस्ताव और एनओसी मांगी है।


व्यापारियों ने खरीदकर 1 रुपए में दी जमीन
1960-62 में सरकार ने छावनी में अनाज मंडी बनाने का निर्णय लिया। मंडी व्यापारियों के संघ ने किसानों से 17 एकड़ जमीन खरीदकर 1 रुपए में मंडी समिति को दी। यहां व्यापारियों को दुकानें और गोडाउन बनाकर देने की शर्त रखी गई। समिति ने करीब 8 एकड़ जमीन पर 140 गोडाउन बनाकर कारोबारियों को दिए व 500 से अधिक व्यापारियों के लिए व्यापार की सुविधाएं जुटाईं।


पहल अच्छी पर जमीन वापस करना होगी
इंदौर अनाज, दलहन, तिलहन व्यापारी से चर्चा की गई तो उन्होंने पहल को बहुत अच्छा बताया। उनका कहना है, मंडी शिफ्ट होने के बाद इस जमीन का उपयोग व्यापारी अपने कार्यालयों के लिए कर सकेंगे। यहां सभी कारोबारियों को बैठने के लिए स्थान मिल सकेगा क्योंकि मंडी समिति को जमीन उन्हें वापस करना होगी। कुछ व्यापारियों ने कहा, शहर से दूरी बढऩे से मुश्किल भी आएगी।


17 एकड़ में मंडी
150 गोडाउन
300 कार्यालय
600 व्यापारी रोज रहते हैं
30 करोड़ रुपए का कारोबार
60 एकड़ पर बनेगी नई मंडी।


कारोबार के लिए छावनी में जगह नहीं
मंडी व्यापारी एसोसिएशन के मनोज काला का कहना है, वर्तमान मंडी व्यापार के हिसाब से छोटी है। 17 एकड़ क्षेत्र स्थित मंडी के 8 एकड़ में गोडाउन हैं। व्यापार के लिए 5 से 7 एकड़ जमीन बचती है, जो व्यापारियों के वाहन, किसानों की ट्रॉलियों व ट्रकों से भर जाती है। इसके चलते इसे शहर के बाहर ले जाना जरूरी है।


शिफ्ट होने से बढ़ेगा व्यापार, होगा फायदा
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर अग्रवाल ने कहा, छावनी अनाज मंडी में आसपास के शहरों से हजारों कारोबारी व किसान आते हैं। ट्रक, छोटे-बड़े लोडिंग वाहनों की आवाजाही से ट्रैफिक को प्रभावित होता है। इसके शिफ्ट होने से व्यापार बढ़ेगा, क्योंकि काफी जगह मिलेगी।