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इंदौर में अब दिल का इलाज जेब पर नहीं पड़ेगा भारी

मवायएच की ओपीडी में आने वाले ह्रदयरोगियों की सूची भी तैयारी हो गई है। साथ ही उन मरीजों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें कैथलैब शुरू होते ही एंजियोग्राफी करवाने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही अस्पताल में इन रोगियों के ह्रदय में मौजूद ब्लॉकेज को भी खत्म किया जाएगा।

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इंदौर

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Lavin Owhal

Oct 06, 2021

इंदौर में अब दिल का इलाज जेब पर नहीं पड़ेगा भारी

इंदौर में अब दिल का इलाज जेब पर नहीं पड़ेगा भारी

इंदौर. शहर का सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल ऐसा पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां पर गरीब मरीजों को एंजियोग्राफी की सुविधा मिलेगी। इसे लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। एमवायएच की ओपीडी में आने वाले ह्रदयरोगियों की सूची भी तैयारी हो गई है। साथ ही उन मरीजों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें कैथलैब शुरू होते ही एंजियोग्राफी करवाने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही अस्पताल में इन रोगियों के ह्रदय में मौजूद ब्लॉकेज को भी खत्म किया जाएगा। कैथलैब का निर्माण कार्य सितंबर माह में ही पूरा कर लिया गया। साथ ही कैथलैब के लिए ह्रदय रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति भी पूरी हो चुकी है। सिर्फ पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टॉफ की वजह से इस अस्पताल में फिल्हाल ह्रदय के मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो पा रहा था। इन दोनों की नियुक्ति होने के साथ ही अब कैथलैब शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए भी तैयारी पूरी हो गई है। तकनीकी विशेषज्ञों को फिल्हाल अस्थाई रूप से नियुक्त किया जा रहा है। इसके बाद स्थाई रूप से नियुक्ति शुरू की जाएगी। कैथ लैब में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लॉस्टी आसानी से की जा सकेगी। इंस्टालेशन का काम हो चुका पूरा सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में कैथलैब शुरू करने के लिए भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद विकिरण प्रभाग द्वारा अनुमति प्रदान कर दी गई है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एडी भटनागर ने बताया कि अस्पताल में मशीन पहले से ही आ चुकी थी, लेकिन फिलहाल लाइसेंस मिलने के साथ ही मशीन के इंस्टालेशन का काम शुरू कर दिया गया था, जो अब पूरा हो गया है। साथ ही जरूरी नियुक्तियां भी पूरी हो चुकी है। इसके चलते अब हम इसे शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अप्रैल से चल रही थी तैयारीदरअसल, कैथलैब को अप्रैल माह से ही शुरू करने की तैयारी थी। इसके लिए जनवरी माह में ही भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएसआरसी) से लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया था। लेकिन अप्रैल माह में ही कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आने की वजह से अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया। अब फिर से अस्पताल को शुरू करने की तैयारियां की जा रही है। 22 सितंबर को लाइसेंस मिलने के बाद अब सारे बचे हुए काम पूरे कर लिए गए हैं। अन्य सुविधाएं भी होगी शुरू कॉर्डियोलॉजी विभाग के अंतर्गत तैयार की गई कैथलैब में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर इंप्लांटेशन, कॉर्डियोग्राफी, स्टेंटिंग, टीएमटी व होल्टर जैसी जटिल जांच व इलाज की सुविधा होगी। बायपास सर्जरी के लिए हार्ट लंग मशीन को लगाने की भी योजना है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की कोशिश है कि सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल सबसे पहले कॉर्डियोलॉजी विभाग को ही शुरू किया जाए। इसकी जिम्मेदारी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. एडी भटनागर को सौंपी गई है। स्टॉफ की ट्रेनिंग हुई पूरीअस्पताल में कॉर्डियोलॉजी विभाग के स्टॉफ की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी हुई है। अस्पताल के अलग-अलग विभागों के लिए अलग से स्टॉफ की नियुक्ति लगातार जारी है। प्रत्येक विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ उनकी एक अलग टीम होगी। यह टीम उक्त विभाग से संबंधित चिकित्सा कार्यों में बखूबी पारंगत होंगे। इसके लिए उन्हें अलग से ट्रेनिंग दी जा रही है। ---सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल की कैथलैब के लिए तैयारी पूरी हो चुकी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द इसे शुरू किया जाए। इसके लिए एमवायएच में ही भर्ती ह्रदयरोगियों को एंजियोग्राफी के लिए अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। डॉ. सुमित शुक्ला, अधीक्षक, सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल

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