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कहानी पर लोगों को यकीन दिलाना ही है आर्ट ऑफ स्टोरी टेलिंग

हम अपने डेली रुटीन में नई-नई कहानियां बनाते हैं और इन्हीं किस्सों से हम अच्छी स्टोरी तैयार कर सकते हैं।

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art of story telling

इंदौर. हम अपने डेली रुटीन में नई-नई कहानियां बनाते हैं और इन्हीं किस्सों से हम अच्छी स्टोरी तैयार कर सकते हैं। बतौर प्रोफेशनल्स स्टोरी टेलिंग के लिए विजन, थिंकिंग और आबजर्वेशन होना चाहिए। लोगों को कहानी में विश्वास दिलाना ही आर्ट ऑफ स्टोरी टेलिंग है। यह कहना है फेमस एनिमेटर ई सुरेश का। वह शुक्रवार को एजीएसआईटीएस में प्रतिङ्क्षबब क्लब की ओर से आयोजित द आर्ट ऑफ स्टोरी टेलिंग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बचपन में पापा मुझे जॉम्बीज की स्टोरी सुनाते थे और मुझे उनपर विश्वास हो जाता था। वहीं से मेरा रिश्ता स्टोरीटेलिंग से जुड़ गया था।

उन्होंने कहा कि स्टोरी टेलिंग की परंपरा सदियों से चली आ रही है। बस वक्त के साथ इसके तरीके बदले हैं। रामायण और महाभारत में जो स्टोरी टेलिंग की गई है वह बेस्ट है। इन दोनों से हमें वैल्यूज सीखने को मिलती है। आज भी राजस्थान में चित्रों से स्टोरी टेलिंग की जाती है। रामायण और महाभारत के किस्से भी चित्रों से बताए जाते हैं। ऑडियो-विजुअल किसी भी कहानी को कहने का सशक्त माध्यम है पर कभी-कभी विजुअल इतने पावरपुल होते हैं कि उनको डिस्क्राइब करने के लिए वड्र्स की जरूरत नहीं होती।

सिर्फ कार्टून नहीं है एनिमेशन
पत्रिका से विशेष बातचीत में ई सुरेश ने कहा कि किसी भी चीज को एनिमेट करते समय यह सोचना होगा कि हम उसका एनिमेशन क्यों तैयार कर रहे हैं? अगर इस सवाल का सही जवाब ढंूढ़ लिया तो एनिमेशन प्रॉपर तैयार किया जा सकता है। लोग एनिमेशन का मतलब सिर्फ कार्टून या कॉमेडी से समझते हैं। एनिमेशन के जरिए सीरियस इश्यु को भी अलग अंदाज में दिखाया जा सकता है। हम जितना ज्यादा रियल वल्र्ड से आब्जर्व कर स्टोरी और कैरेक्टर में इनपुट डालेंगे, उतना ही ऑडियंस स्टोरी से कनेक्ट कर पाएंगे। सॉफ्टवेयर ने एनिमेशन आसान कर दिया है। इसके लिए नजरिया और सोच जरूरी है। छात्रों ने शॉर्ट फिल्म्स फिशर वुमेन व टूक-टूक, टोकरी भी देखी।

नए करैक्टर तैयार करने की जरूरत
बाहुबली के बाद से इंडिया में एनिमेशन को लेकर लोग सीरियस हो गए हैं, लेकिन फिर भी हम वेस्टर्न कंट्री से काफी पीछे है। इसका मुख्य कारण है कि वहां एनिमेशन पर काफी पहले से काम किया जा रहा है और हमें इस फील्ड में अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। जैसे-जैसे हम इसमें आगे बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे उनके लेवल पर पहुंचते जाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि हम नए कैरेक्टर तैयार करें जो कि माइथोलॉजी से बिल्कुल अलग हो। माइथोलॉजिकल कैरेक्टर की स्टोरी सभी को पता है, इस वजह से उनमें ज्यादा स्कोप नहीं है।