
Article 370 : कश्मीर में मोदी का दूसरा बड़ा कदम, घाटी में फिर लौटेंगे कश्मीरी पंडित
भूपेन्द्र सिंह @ इंदौर. पिछले दिनों गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि केंद्र सरकार के प्रयासों से देश के करीब 610 कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandit) की कश्मीर स्थित भूमि बहाल की गई है। इसके बाद शहर में रहने वाले कश्मीरी पंडितों को भी अपना हक मिलने की आस जगी है। पिछले कुछ महीनों से कश्मीरी पंडितों की कश्मीर स्थित प्रापर्टी दिलाने की प्रक्रिया चल रही है साथ ही वहां के निवास प्रमाण-पत्र भी बनाकर देना शुरू हो चुका है।
साल 2019 में केंद्र सरकार ने कश्मीर से आर्टिकल 370 (Artical 370) हटाया था। तब से ही कश्मीरी पंडितों को अपने हक और पुर्नवास की आस जगी थी। गौरतलब है कि 1990 के आसपास कश्मीरी पंडितों को रातोरात पुर्नवास हुआ था। असामाजिक तत्वों ने उनकी जमीनें, खेत और मकानों पर कब्जा जमा लिया था। तब से देश के अलग-अलग हिस्सों में कश्मीरी पंडित रह रहे हैं। शहर में करीब 132 कश्मीरी परिवार रहते हैं।
सरकार ने दिल्ली और जम्मू में बनाए सेंटर
सरकार ने दिल्ली और जम्मू में सेंटर बनाकर ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की हुई है। दो तरह से आवेदन लिए जा रहे हैं। एक प्रापर्टी से संबंधित तो दूसरा निवास प्रमाण-पत्र के लिए। पूराने दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय निवास प्रमाण पत्र बनाया जा रहा है। अब तक 50 प्रतिशत लोगों ने प्रमाण-पत्र हासिल कर लिए है। जिन-जिन लोगों की जमीनें, खेत और मकान कब्जा किए हुए है उसकी जानकारी भी आवेदन के साथ दी गई है।
सेब-अखरोट के बाग, कई जमीनों का किया आवेदन
सरकार द्वारा कश्मीर (Kashmir) स्थित हमारी प्रापर्टी को वापस दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है साथ ही निवास प्रमाण-पत्र के भी आवेदन हो रहे हैं। पुलवामा में हमारे सेब-अखरोट के बागों और करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। फिर से अपनी प्रापर्टी पाने के लिए हमने आवेदन किया है। शहर में रहने वाले 132 कश्मीरी पंडित परिवार कश्मीरी समिति के बैनर तले एकजुट है।
वीरेन्द्र कौल, कश्मीरी पंडित
अनंतनाग से पटवारी का आया फोन
हमारी अनंतनाग में दो जमीनें हैं। हमने प्रापर्टी क्लेम करने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया है। सभी कागजात भी लगाए है। कुछ दिनों पहले अनंतनाग से पटवारी का फोन भी आया था। प्रापर्टी चिन्हित करने का काम किया जा रहा है। हमे हमारा हक तो मिलना ही चाहिए इसके साथ ही कश्मीर में सुरक्षित माहौल होगा तभी वहां पुर्नवास संभव है जो कि थोड़ा मुश्किल दिखाई दे रहा है।
अशोक बमरू, कश्मीरी पंडित
आवेदन करेंगे
स्थानीय निवासी के प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। प्रक्रियाओं की बात कई बार हुई है। उस समय जिन लोगों ने डर के कारण अपने मकान-जमीनें कौडि़यों के भाव बेचे थे उन प्रकरणों पर भी विचार होना चाहिए एेसे प्रकरणों पर भी सरकार के विचार करने की बात सामने आई है। कश्मीर में हक दिलाने के साथ ही सुरक्षित माहौल बनाना जरूरी है।
विवेक रैना, कश्मीरी पंडित
Updated on:
14 Feb 2022 08:18 pm
Published on:
13 Feb 2022 04:55 pm
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