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एशिया की सबसे ऊंची गणेश मूर्ति है यहां, श्रृंगार करने में लगते हैं 8 दिन

मूर्ति का ढांचा, सोने, चांदी, पीतल, तांबे और लोहे से बना हुआ है....

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Ganesh idol

इंदौर। बड़ा गणपति मंदिर इंदौर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर गणेश जी की विशाल प्रतिमा के कारण विख्यात है। गणेश जी की यह मूर्ति 25 फीट ऊंची है, जिसे पूरी दुनिया में एशिया की सबसे ऊंची मूर्ति माना जाता है। एक स्वप्न के परिणामस्वरूप एक अवंतिका (उज्जैन) निवासी दधीच ने 1875 में इस मंदिर का निर्माण किया था। इस मूर्ति का निर्माण ईटों, चूने के पत्थरों, गुड़, सात पठारों की मिट्टी, घोड़ों, गाय और हाथियों के पैरों कुचली मिट्टी व कीचड़, पंचरत्नी के पाउडर (हीरा, पन्ना, मोती, माणिक और पुखराज) और कई धार्मिक स्थलों के पवित्र जल से किया गया है।

8 दिन लगते हैं चोला, श्रृंगार करने में

पुजारी पंडित प्रमोद दाधीच ने बताया गणेश जी का श्रृंगार में करीब 8 दिन का समय लगता है। साल में चार बार यह चोला चढ़ाया जाता है। जिसमें भाद्रपद सुदी चतुर्थी, कार्तिक बदी चतुर्थी, माघ वदी चतुर्थी और बैसाख बढी चतुर्थी पर चोला और सुंदर वस्त्रों से श्रृंगार किया जाता है। इसमें करीब सवा मन घी और सिंदूर का उपयोग होता है। मूर्ति का ढांचा, सोने, चांदी, पीतल, तांबे और लोहे से बना हुआ है।

50 साल तक नहीं थी स्थायी छत

इसमें सभी तीर्थ स्थानों का जल और काशी, अयोध्या, अवंतिका और मथुरा की मिट्टी को मिलाने के साथ ही घुड़साल, हाथीखाना, गोशाला की मिट्टी और रत्नों में आदि का भी समावेश है। प्रतिमा की ऊंचाई 25 फीट है जो 4 फुट ऊंचे और 14 फुट चौड़ी चौकी पर विराजी है। इसे बनाने में करीब तीन साल का समय लगा। प्रतिमा का मुख सोने और चांदी, कान, हाथ तथा सूंड तांबे से और पैर लोहे के सरियों से बनाए गहैं। प्राण प्रतिष्ठा के 13 साल बाद तक इसके उपर कोई छत नहीं थी। गणपति खुले आकाश के नीचे विराजे ही थे। फिर 1954 में स्थाई छत का निर्माण किया गया।