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दिल्ली दरबार की कहानी निराली…नहीं समझ पा रहे कांग्रेसी

अब नए पर्यवेक्षक की क्लास में बैठे दावेदार, शहर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के बजाय बांटते फिर रहे विधानसभा चुनाव के टिकट    

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दिल्ली दरबार की कहानी निराली...नहीं समझ पा रहे कांग्रेसी

इंदौर.
कांग्रेस में अब नए पर्यवेक्षक आ गए हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी करने वाले नेताओं की क्लास लगाई, लेकिन कई दावेदार गांधी भवन की सीढ़ी नहीं चढ़े। शायद उन्हें समझ आ गया कि पर्यवेक्षकों के हाथ में कुछ नहीं है। संगठन को मजबूत करने के लिए भेजे जा रहे पर्यवेक्षक इस काम को छोड़कर चुनावी टिकट बांटने में लगे हैं।

शहर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए दिल्ली से पर्यवेक्षकों को भेजा जा रहा है। इनके पीछे लोकल कांग्रेसी भी घूम रहे हैं, जबकि पर्यवेक्षकों के हाथ में कुछ नहीं है। मंडलम्, सेक्टर, बूथ और ब्लॉक अध्यक्ष सहित कमेटियां गठित करने के लए पर्यवेक्षकों को भेजा जा रहा है, लेकिन वे इस काम को छोड़कर दावेदारों की बैठक लेकर टिकट बांटने और काटने की बात कर रहे हैं। पर्यवेक्षक निमिष शाह अभी तक यही करते नजर आए, वहीं कल एक और नए पर्यवेक्षक जोत सिंह बिस्ट आ गए, जो शाह से ऊपर हैं। इनके पास इंदौर-उज्जैन संभाग की २० से २२ विधानसभा का प्रभार है, जबकि शाह के पास सिर्फ इंदौर जिले की।

कांग्रेसियों के अनुसार शाह के बड़ी होटलों में बैठक करने के साथ शाही भोज का आनंद लेने व मंडलम्, बूथ, सेक्टर और ब्लॉक कमेटियों के गठन में सुस्त रवैये की लगातार शिकायत भोपाल से दिल्ली तक पहुंचने पर नए पर्यवेक्षक बिस्ट को भेजा गया। इन्होंने पार्टी कार्यालय गांधी भवन में शहरी क्षेत्र की विधानसभा 1 से 5 तक के दावेदारों की बैठक ली। इस दौरान शहर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष विनय बाकलीवाल मौजूद थे।

कांग्रेसियों के अनुसार कई दावेदार गांधी भवन की सीढ़ी तक नहीं चढ़े। जो दावेदार पहुंचे, वे हार-जीत का गणित समझाने के साथ तैयारी के दस्तावेज सौंप कर चल गए। दावेदारों से बिस्ट ने पूरी लगन से मेहनत करने और एकजुटता के साथ चुनाव लडऩे की बात कही। मालूम हो कि पिछले दिनों इंदौर यात्रा पर आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव में कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से नहीं, उसके मजबूत संगठन से है। इसलिए कांग्रेस को मजबूत करने पर बल दिया जा रहा है।

कितने पर्यवेक्षक आएंगे
कांग्रेसियों ने सवाल उठाया कि इंदौर शहर में कितने पर्यवेक्षक आएंगे? सबसे पहले अमित शर्मा, उनके बाद नरेश गोदारा और निमिष शाह आए। अब बिस्ट आ गए हैं। इनके अलावा एक-दो फर्जी नेता भी पर्यवेक्षक बनकर आ गए थे। ये कांग्रेस को मजबूत करने का काम छोड़कर दावेदारों की बड़ी कारों में घूमने के साथ ऐश कर रहे हैं, जबकि चुनाव के मद्देनजर इन्हें कांग्रेस को मजबूत करने के लिए भेजा गया है।