
इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 76 खाली पदों के लिए हुई सीधी भर्ती में जमकर मनमानी और भाई-भतीजावाद चला। 4 दिनों में कई विभागाध्यक्षों, प्रोफेसर्स समेत पूर्व डॉक्टर्स के बेटा-बेटी व बहू का चयन हो गया। इनमें डीन डॉ. शरद थोरा के बेटा-बहू भी हैं। 20 अप्रैल तक आवेदन लेने के बाद 25 अप्रैल से इंटरव्यू हुए। शनिवार को भर्ती प्रक्रिया का अंतिम दिन था। जल्द ही चयनित अभ्यार्थियों के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए जाएंगे। उधर, कुछ अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में मनमानी के आरोप लगाने के साथ चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
अभ्यार्थियों के आरोप है, भर्ती शर्तों में इंटन्र्स को प्राथमिकता देने की शर्त का खुला उल्लंघन किया गया। नियमों को ताक पर रखकर पात्रों को मौका नहीं दिया गया। डीन डॉ. थोरा खुद चयन प्रक्रिया में शामिल थे। कॉलेज प्रबंधन का कहना है, चयन मेरिट के आधार पर ही किया गया। इसमें एमबीबीएस के अंकों को प्राथमिकता दी गई।
रैंकिंग लिस्ट ताक पर
पैथोलॉजी विभाग में तीन खालों पदों में इंटरनल कैंडिडेट अमित घारिया को नहीं लिया, जबकि विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा था कि पहले इंटरनल कैंडिडेट का सिलेक्शन होगा, बाकी पदों पर दूसरे अभ्यर्थी लिए जाएंगे। सिलेक्ट हुए डॉक्टर्स में दो आईएएस अधिकारियों के बच्चे, वहीं एक निजी पैथोलॉजी कंपनी के हेड का बेटा है। ब्लड बैंक में अमृता त्रिपाठी को छोडक़र योगेश पावडे़ को लिया, जबकि अमृता लिस्ट में रैंङ्क्षकग में सबसे ऊपर थीं।
इनके बेटे-बहू भी बने प्रोफेसर
चयन सूची में कॉलेज व शहर के लगभग सभी प्रमुख डॉक्टर्स के रिश्तेदारों के नाम हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शरद थोरा के बेटे अंकित का हड्डी रोग और बहू आकांक्षा का महिला रोग एवं प्रसूति विभाग में चयन किया गया है। आईएएस अफसरों के बच्चों में मिताक्षरा शर्मा और प्रियंका कियावत का सिलेक्शन किया है। डॉ. अनिल भराणी, डॉ. अपूर्ण पौराणिक, डॉ. राजकुमार माथुर व डॉ. पूनम माथुर के बेटे राहत का मानसिक रोग विभाग व बेटी पूजा माथुर का महिला रोग व प्रसूति विभाग में सिलेक्शन हुआ है। डॉ. अशोक वाजपेयी, डॉ. आरके मूंदड़ा, डॉ. प्रदीप भार्गव के बेटा-बेटी या बहू का भी सिलेक्शन हुआ है।
चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। सभी अभ्यर्थियों का चयन नियम अनुसार किया गया है। डॉक्टर के बच्चे यदि डॉक्टर बनते हैं तो इसमें दिक्कत क्या है? - संजय दुबे, संभागायुक्त
ये है नियम
लोक सेवा आयोग के नियमों के मुताबिक यदि आपका रिश्तेदार अभ्यर्थी है तो उस व्यक्ति को चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता। परिवार का सदस्य इंटरव्यू में बैठ रहा हो तो आपको उस प्रक्रिया से दूर रहना चाहिए, लेकिन डीन डॉ. थोरा ने प्रक्रिया ही अपने सामने करवाई।
डॉ. शरद थोरा, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज
सवाल: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती चयन प्रक्रिया में रिश्तेदारों का चयन क्यों किया गया?
जवाब : भर्ती में अनियमितता नहीं की गई। सभी आवेदकों के मेरिट व एबीबीएस के नंबर सहित अन्य योग्यताओं के आधार पर 80 नंबर तक की मार्किंग की गई। 20 नंबर इंटरव्यू के थे, जो इसमें पास आवेदक ही चयनित किए गए।
सवाल : आरोप है, डॉक्टर्स ने पद का इस्तेमाल करते हुए चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया है?
जवाब : सभी डॉक्टर्स के बच्चे उच्च शिक्षित होने के साथ ही भर्ती की शर्तों को पूरा करने में सक्षम थे। इसके लिए आवेदन के साथ चेकलिस्ट भी मांगी थी। भर्ती प्रक्रिया नियम 2003 के तहत ही चयन किया गया है।
सवाल : आपके बेटे-बहू दोनों का चयन कर लिया गया, कैसे?
जवाब : ७६ में से मेरे बेटे की ५२ रैंक थी। एमएस करने के साथ वह टॉपर भी रहा है। बहू भी मेरिट में आई है।
सवाल : अन्य आवेदकों का आरोप है कि उन्हें मौका नहीं दिया गया?
जवाब : भर्ती के लिए ३०० से अधिक आवेदन आए थे। इसमें स्क्रूटनी, योग्यता व इंटरव्यू के बाद चयन किया गया। डॉक्टर्स के बच्चों के अलावा अन्य ७० अभ्यर्थी का भी चयन किया गया।
सवाल : आप खुद डीन हैं, एेसे में आपके होते हुए बच्चों का सिलेक्शन शंकास्पद बताया जा रहा है?
जवाब : मेरिट पोस्ट की स्क्रूटनी व पोस्ट डिक्लियरेशन में पारदर्शिता बरती जाती है। जिन दिन मेरे बेटे-बहू का इंटरव्यू था, उस दिन मैंने छुट्टी ले ली। डीन का प्रभार डॉ. सलिल भार्गव के पास था।
इतने पद थे खाली
21 कुल विभाग
76 कुल खाली पद
55 अनारक्षित
वर्ग
04 अनुसूचित जाति
10 अनुसूचित जनजाति
07 अन्य पिछड़ा वर्ग
Published on:
29 Apr 2018 10:47 am
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