
- बाबा साहेब से प्रेरणा, अभाव और अपमान मिलने पर भी शिखर पर पहुंचे
इंदौर.
राष्ट्रपति ने करीब अपने १६ मिनिट के उद्बोधन में देश में चल रहे वर्ग संघर्ष की ओर इशारा करते हुए युवाओं को अराजकता से दूर रहने की अपील की। बाबा साहेब बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, समाज के कमजोर वर्ग को आगे लाने के लिए किया गया उनका संघर्ष प्रेरणा देता है, अभाव-अपमान के बाद भी समाज की भलाई कर सकते हैं। बाबा साहेब गौतम बुध्द के सिंध्दातों पर चलते थे, महिला सशक्तिकरण के पक्षधर थे। राष्ट्रपति कोविंद ने बताया कि बाबा साहब ने मात्र २७ साल की उम्र में स्माल होल्डिंग इन इंडिया एण्ड रेमेडीज शीर्षक से जो आलेख लिखा उसने उन्हें अर्थशास्त्री की उपाधि दी। देश में आरबीआई की स्थापना में उनका बहुत सहयोग रहा। अधुनिक भारत के निर्माण में संविधान के साथ अनेक योजनाओं की नींव रखी। उनके ही प्रयास रहें, देश में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई। उन्होंने कहा यहां आ कर मुझे बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने प्रेरणा को और मजबूति मिली। मत्था टेककर लगा संविधान को नमन कर रहा हूंराष्ट्रपति ने कहा मैंने यहां आने से पहले पता किया, अब तक १३ राष्ट्रपति में से कितने राष्ट्रपति महू आए हैं। मुझे बताया गया, आप १४ अप्रैल को वहां जाने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे। मैंने सोचा, संंविधान की शपथ ली है जिसके रक्षण, परीरक्षण का दायित्व मुझे सौंपा गया है। उसके निर्माता स्वयं बाबा साहेब की जन्मभूमि पर नहीं जा सकूंगा तो अंतर्मन में ग्लानि रहेगी। बस यही सोचकर में आज महू आया उनके स्मारक पर गया मत्था टेका तो मुझे लगा कि मैं उस संविधान को नमन कर रहा हूं जिसकी रक्षा का जिम्मा आप सभी ने मुझे दिया है।
शिक्षा को किताबों से बाहर लाएं
उन्होंने कहा, बाबा साहेब ने दलित व पिछड़े वर्ग को उपर लाने के लिए शिक्षा का सहारा लिया। हर काम को अहिंसात्मक तरीके से समाज में जागरूकता ला कर किया। शिक्षा के बारे में कहते थे, शिक्षा किताबी ज्ञान, तकनीकी तक सीमित नहीं रहे, शिक्षा मनुष्य की कसौटी है। इसे व्यावहारिक बनाएं। बाबा साहेब ने खुद अपनी उर्जा को शिक्षित होने में लगाया। महिलाओं की समानता पर नेहरू से मतभेद होने पर मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने जमीन पर बैठकर खाना खायाकार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल आनंदी बेन समेत सभी नेताओं के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया। उन्हें पूरी, रामभाजी, नमकीन, नुक्ती, खिचड़ी, केरी की लौंजी और तली मिर्च परोसी गई। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री गेहलोत, प्रदेश के मंत्री, दलित नेता, भंते और कार्यक्रम में आए अनुयायी मौजूद थे। राष्ट्रपति के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। इंदौर से महू गए कोविंदराष्ट्रपति पहले इंदौर तक विमान से आए उसके बाद हेलिकॉप्टर से यात्रा कर महू पहुंचे। विमानतल पर मप्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, महापौर मालिनी गौड़, मंत्री अर्चना चिटनिस व संभागायुक्त संजय दुबे, एडीजी अजय शर्मा, एडीएम अजय देव शर्मा ने आगवानी की। समय से पहले आएजहां राजनीतिक नेता हमेशा ही कार्यक्रम में देरी से पहुंचते हैं वहीं राष्ट्रपति ने समय से पहले पहुंचकर अलग ही पहचान बनाई। राष्ट्रपति के साथ मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी मंच पर पहुंचे। राष्ट्रपति ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। नई परंपरा के साथ ही मंच पर देश के राष्ट्रपति का सम्मान फूलों से नहीं बल्कि राजबाड़ा, शौर्य स्मारक और गौतम बुध्द के प्रतीक चिंन्ह दे कर किया गया।
रह गई कई खामियां- राष्ट्रपति के मंच से जनता की दूरी इतनी होना चाहिए कि कोई भी कुछ सामान राष्ट्रपति तक न फेंक सके। इसका ध्यान नहीं रखा गया।
- सभा स्थल पर ५ हजार लोगों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं की गई, १ लाख लोग पहुंचे थे। महू अकोला रूट बंद होने से दिखा असरमहू अकोला रूट बंद होने की वजह से हजारों श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंच सके। इसकी भरपाई करने के लिए बसें चलाई गई लेकिन भीषण गर्मी की वजह से लोगों ने बस के सफर से परहेज किया।
Published on:
15 Apr 2018 04:04 am
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