
श्री सत्यसाईं सेवा संगठन का बाल विकास कार्यक्रम...
इंदौर. परिवार-समाज की धुरी महिला ठान ले तो समाज को बदलने की क्षमता रखती है। वह मां, बहन, शिक्षिका जैसे अनेक रूप में समाज को पोषित कर रही है। महिला के इसी जज्बे ने समाज में संस्कारों को जीवित रखा है। शहर में एेसी ही महिलाओं का एक समूह कॉलोनियों, बस्तियों के बच्चों के बीच संस्कारों को रोपकर नई पौध का विकास कर रहा है।
हम बात कर रहे हैं श्री सत्यसाईं सेवा संगठन के बाल विकास कार्यक्रम विंग की। संगठन का यह एकीकृत कार्यक्रम पूरे देश में चलता है, लेकिन इंदौर में इसलिए खास है कि यहां की कमान महिलाओं ने संभाल रखी है। शहर में ४०-५० महिलाओं का यह समूह वर्षों से बच्चों को संस्कार शिक्षा के माध्यम से अच्छा इंसान बनाने की कोशिश कर रहा है। संगठन का मानना है, नाबालिग व किशोरों में विकृति का भाव आ रहा है। जुवेनाइल क्राइम बढ़ रहा है। दिल्ली में निर्भया कांड ने पूरी दुनिया को इस दिशा में सोचने को मजबूर कर दिया कि हमारे नैतिक मूल्य दूर हो रहे हैं। यह शिक्षा में मॉरल साइंस की किताबों तक सीमित रह गए हैं। अमेरिका, यूरोप जैसे देश भी इसे मानकर मानवीय मूल्यों के रूप में शिक्षा में शामिल कर रहे हैं।
संगठन पांच मूल्यों सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा का विकास नियमित पाठ्यक्रम के माध्यम से कर रहा है। इसके लिए ५ से १३ वर्ष के बच्चों की आवासीय कक्षाएं ली जाती हैं। इसके लिए नियुक्त बाल विकास गुरु अपने क्षेत्रों में घरों या स्कूलों में इसे अनुमति लेकर चलाते हैं। इंदौर में सक्रिय बाल विकास गुरु मोहिनी बाला माथुर, अनु सचदेवा, वंदना भल्ला, सुवर्णा महिवाल, सुजाता कुलकर्णी, प्रियम मिश्रा, नमिता दुबे, दिव्या बेहरवानी, नीता नाईक, शोभना चैतन्य बच्चों को श्लोक, नीति कथाओं, ज्योति ध्यान आदि विधाओं से प्रेरणा दे रही हैं।
Published on:
08 Mar 2018 06:10 am
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