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बच्चों को रोमांचित कर गए बार्किंग डियर और फ्लाइंग स्क्विरल

स्मार्टफोन और वीडियो गेम्स की दुनिया से दूर करने का प्रयास, नन्हों के लिए शुरू की जंगलों की सैर

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Jungle safari

बच्चों को रोमांचित कर गए बार्किंग डियर और फ्लाइंग स्क्विरल

इंदौर. स्मार्टफोन और वीडियो गेम की दुनिया से बच्चों को दूर कर प्रकृति की गोद में ले जाने की एक पहल शुरू हुई है। शहर के एक ग्रुप ने बच्चों को सामाजिक और प्राकृतिक मूल्यों से जोडऩे के लिए उन्हें जंगलों की यात्रा पर ले जाने का सार्थक प्रयास किया है। अभी तक बच्चे जिन बातों को सिर्फ किताबों में पढ़ते थे, उनके लिए भी ये सब देखना और महसूस करना किसी रोमांच से कम नहीं। भले ही यह उनके लिए आज एक मनोरंजन है लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि इस बहाने बच्चों को प्रकृति के करीब लाया जा सके। पिछले सप्ताह शहर के कुछ बच्चों को इन सर्च ऑफ लॉस्ट पगमाक्र्स (आइएसएलपी) ग्रुप द्वारा मेलघाट टाइगर रिजर्व की यात्रा पर ले जाया गया। यह ग्रुप लोगों को प्रकृति से जोडक़र जीवन के मूल्य सिखाने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में इस बार बच्चों को रोमांचित यात्रा पर ले गए। यहां भालू, हाथी, तेंदुआ के साथ ही बच्चों ने उन जानवरों को भी देखा जिन्हें देखना कभी-कभार ही संभव होता है। बच्चों के लिए सबसे खास पल वह रहा जब उन्होंने रात को मेलघाट के जंगलों में भौंकने वाला हिरण (बार्किंग डियर) और उडऩे वाली गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) को देखा। इसी के साथ हरे रंग का कबूतर (हरियल) और हजारों पक्षियों की चहचहाहट सुनकर बच्चे खुशी से झूम उठे। दिन में सफारी करते वक्त जिप्सी
बच्चों ने सीखी यह सब बातें
-जंगलों का महत्व एवं वर्तमान ज्वलंत मुद्दे।
- खतरनाक प्राणियों के बारे में जानकारी एवं सावधानियां।
- रात्रिचर वन्यप्राणियों के बर्ताव एवं उनको सुरक्षित रूप से अवलोकन करने का तरीका।
- वन्यप्राणी संरक्षण के विभिन्न उपाय।
- बाघ को उसके प्राकृतिक वास में खोजने और देखने के तरीके।
- बाघ को खोजने में सहायता करने वाले प्राणियों जैसे चीतल, सांभर, लंगूर, टिटहरी एवं भौंकने वाले मृग की आवाज पहचानना।
- भालू एवं तेंदुए के बर्ताव एवं उनके हमले से बचने के लिए सावधानियां। के सामने अचानक भारतीय गोर भी आया जो जंगली मवेशियों में सबसे भीमकाय जानवर है। यह अकेला ही पूरी जीप को पलट देता है।

हथनी लक्ष्मी ने सिखाए परिवार के संस्कार
हाथियों में एक नियम होता है कि बुजुर्ग हाथी सबसे आगे चलता है और बाकी सब पीछे चलते हैं। बच्चों को भी हथनी लक्ष्मी के माध्यम से यह बताया गया कि किस तरह से जानवर भी परिवार के इन मूल्यों को समझते हैं। लक्ष्मी 75 साल की सेवा के बाद रिटायर हो गई है और अब वन विभाग उसका ध्यान रखता है। वन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को लक्ष्मी से मिलवाया और उसकी सवारी भी करवाई। हम इंतजार कर ही रहे थे कि इसी बीच सबसे बूढ़ी हथनी (लक्ष्मी) जंगल से हमारी ओर आती दिखी। बाकी सारे हाथी उसके पीछे-पीछे लाइन से आ रहे थे। हाथियों के समाज में बड़ो का स्थान सबसे ऊंचा रहता है, इसलिए सभी हाथी उसके पीछे ही चल रहे थे। उनके नजदीक आने पर लक्ष्मी एक पेड़ के सहारे खड़ी हो गई और बाकी सभी हाथियों को उनके महावतों ने संभाल लिया।