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एक माह से हथकड़ी में कैद है बैटरी कार, यात्री हो रहे परेशान

- लगातार दुर्घटनाओं के चलते स्टेशन प्रबंधन ने लगा रखी है रोक  

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इंदौर

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Amit Mandloi

Sep 15, 2018

battary car railway station

thebdएक माह से हथकड़ी में कैद है बैटरी कार, यात्री हो रहे परेशान

इंदौर। बुजुर्ग, विकलांश व महिला यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक पहुंचाने के लिए मिली बेट्री कार की सौगात पर पिछले करीब एक माह से अटकी हुई है। स्टेशन को पिछले वर्ष से मिली इस सौगात का फायदा तो यात्री उठा रहे हैं लेकिन कंपनी द्वारा सही संचालन न किए जाने के कारण आए दिन ये सुविधा सुर्खियां बटोर लेती है। पिछले माह १९ अगस्त को बैट्री कार फिर प्लेटफार्म से गिरकर पटरी पर आ गई थी। इसे देखते हुए रेलवे ने आगामी आदेश तक इस सुविधा को बंद करने का निर्णय लिया है। अब इस सुविधा को आगे जारी रखना है या नहीं इस पर भी रेलवे मंडल द्वारा गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वहीं बैटरी कार के बंद होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।

यात्रियों की हो रही फजीहत
इंदौर रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन करीब ३० हजार यात्री आते-जाते हैं। इसमें ज्यादातर यात्री आरक्षित श्रेणी के होते हैं। इन सभी के पास लगेज भी ज्त्यादा होता है। एेसे में यात्रियों को स्टेशन पर कुली के साथ ही बैटरी कार की जरूरत पड़ती है। स्टेशन पर फिलहाल करीब ४८ कुली काम करते हैं जो ४० किलो तक का वजन प्लेटफार्म ४ से एक के बीच ले जाने के एवज में ५० रुपए शुल्क लेते हैं। वहीं बैटरी कार मात्र २० रुपए में यात्रियों को लगेज सहित प्लेटफार्म तक पहुंचाती है। एेसे में यात्रियों की प्राथमिकता बैटरी कार को लेकर बढ़ गई थी। एेसे में पिछले माह हुद हादसे के बाद डीआरएम ने संचालक को सजा देते हुए अस्थाई तौर पर बंद करने के निर्देश जारी कर दिए थे।

तीन बार आ चुकी पटरी पर कार
अपै्रल २०१७ में बिहार की एक कंपनी को बैटरी कार चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। नियमानुसार हर बैटरी कार को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में ट्रेन के आते ही अलग-अलग प्लेटफार्म पर तैनात न रहते हुए ये कारें एक ही प्लेटफार्म पर पहुंच जाती है। १९ अगस्त को हुई घटना के बाद आरपीएफ ने बैटरी कार संचालन करने वाली कंपनी पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके पहले १० जून को भी बैटरी कार प्लेटफॉर्म से पटरी पर जा गिरी थी। दो बार इस कार से यात्री भी घायल हो चुके हैं। इसकी शिकायत जीआरपी थाने में की गई। पिछली बार रतलाम मंडल ने कार्रवाई करते हुए बैटरी कार संचालक को तीनों कारों में करंट कंट्रोलर लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस बार हादसा ड्राइवर की गलती से हुआ था।