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रेरा से खरीददार और डेवलपर्स दोनों रहेंगे फायदे में

मप्र रियल इस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट लागू करने वाला पहला प्रदेश

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इंदौर. नौ साल पहले प्लॉट, मकान, फ्लैट की खरीदारी में लोगों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए एक अधिनियम की कल्पना की गई थी। लंबे इंतजार के बाद संसद ने इस कानून को स्वीकृति दी और राज्यों को इसे लागू करने के लिए कहा। मप्र 1 मई 2017 से प्रदेश में रेरा कानून लागू कर देश का पहला राज्य बन गया। रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन कर दिया गया है। इतना ही नहीं, प्रदेश में निवेश क्षेत्र में प्रचलित प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। अथॉरिटी को १६४० से अधिक प्रोजेक्ट के आवेदन रजिस्ट्रेशन के लिए मिले हैं। इस कानून के लागू होने का फायदा सिर्फ खरीदारों को ही नहीं होगा, बिल्डर्स व डेवलपर्स के लिए भी फायदे का सौदा है। इससे दोनों के बीच होने वाले विवादों को कानूनी हल मिलेगा, वहीं समयसीमा में हाउसिंग प्रोजेक्ट पूरे हो सकेंगे। सबसे बड़ी बात, अवैध और अनियोजित विकास पर शिकंजा कसा जा सकेगा।

देश में बिल्डर्स, डेवलपर्स और खरीदारों के बीच आपसी समन्वय और विश्वास बनाने के लिए पिछले साल मार्च में संसद में एक कानून पास किया गया था। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी बिल को स्वीकृति देकर सभी राज्यों को निर्देशित किया गया, वह अपने नियम बनाकर कानून को लागू कर सकते हैं। प्रदेश में मई २०१७ से इसे लागू कर दिया गया। इसके तहत अब खरीदार बिल्डर की मनमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी।

क्या है रेरा कानून
रियल एस्टेट विनियमन और विकास अधिनियम- 2016 भारत की संसद का एक अधिनियम है। इसे घर खरीदारों के हितों की रक्षा और अचल संपत्ति उद्योग में अच्छे निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। बिल राज्यसभा द्वारा 10 मार्च 2016 को और लोकसभा में 15 मार्च 2016 को पारित कर दिया गया था। इसमें 92 धाराएं बनाई गई हैं। 69 अधिसूचित वर्गों के साथ 1 मई 2016 से ये अधिनियम अस्तित्व में आया।
इस अधिनियम को बिल्डर्स, प्रमोटर्स और रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए बनाया गया है। इन शिकायतों में मुख्य रूप से खरीदार के लिए घर कब्जे में देरी, समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भी प्रमोटरों का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और कई तरह की समस्याएं हैं। इसके तहत एक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा के साथ ही प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए एक पथ रखना है।

इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं
- राज्य स्तर पर रियल एस्टेट नियामक आयोग या प्राधिकरण का गठन करना होगा। इसका काम प्रदेश में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करना होगा। डेवलपर्स और खरीदारों के बीच विवादों का निराकरण और समय पर प्रोजेक्ट पूरे होने की निगरानी करना होगा।
- त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का 60 दिन के भीतर समाधान।
- 5000 वर्गफीट या 8 अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोडक़र सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
ठ्ठ ग्राहकों से ली गई 70% राशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान।
- परियोजना संबंधी जानकारी, जैसे ले-आउट, स्वीकृति, ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट की मियाद का विवरण खरीदार को अनिवार्यत: देने का प्रावधान।

ऐसे कराना होगा रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
- आवेदन के साथ प्रोजेक्ट की वैधता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज, कंपनी का रजिस्ट्रेशन, प्रमोटर्स का आधार कार्ड, पेन कार्ड, फोटो, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फीस चार्ट, इंजीनियर का प्रमाण-पत्र, टीएंडसीपी व प्रशासन की अनुमतियों सहित 18 दस्तावेज लगाना होंगे।