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बड़े पर्दे पर छोटे रोल से अच्छा है, यहां लीड रोल करू

सफलता किसी को एक दिन में नहीं मिलती। वर्षों की मेहनत और लगातार प्रयासों के बाद आपकी अपनी पहचान बनती है। मुझे भी छोटे पर्दे पर काम करते हुए करीब 10 साल हो गए। उसके बाद आज मैं आप सभी के सामने हूं। शुरुआत में मुझे भी स्ट्रगल करना पड़ा, लेकिन आज देखने में आता है कि युवा सिर्फ एक दिन में सफलता हासिल करना चाहता है। यही कारण है कि वह मेहनत नहीं करते हुए फल की इच्छा करता है और सफलता पाने के पहले ही हार मान लेता है।

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इंदौर

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Rahul Dave

Mar 04, 2022

बड़े पर्दे पर छोटे रोल से अच्छा है, यहां लीड रोल करू

बड़े पर्दे पर छोटे रोल से अच्छा है, यहां लीड रोल करू

सफलता किसी को एक दिन में नहीं मिलती। वर्षों की मेहनत और लगातार प्रयासों के बाद आपकी अपनी पहचान बनती है। मुझे भी छोटे पर्दे पर काम करते हुए करीब 10 साल हो गए। उसके बाद आज मैं आप सभी के सामने हूं। शुरुआत में मुझे भी स्ट्रगल करना पड़ा, लेकिन आज देखने में आता है कि युवा सिर्फ एक दिन में सफलता हासिल करना चाहता है। यही कारण है कि वह मेहनत नहीं करते हुए फल की इच्छा करता है और सफलता पाने के पहले ही हार मान लेता है। आज भी यदि मुझे बड़े पर्दे पर काम करने का अवसर मिलेगा तो मैं क रूंगा। अभी जो रोल मिल रहे हैं उसमें कुछ ही देर के सीन हैं, ऐसे में मेरा मानना है कि बड़े पर्दे पर छोटा रोल अदा करने से अच्छा है, यहां लीड रोल में काम क रूं। यह बात जल्द शुरू होने वाले टीवी सीरियल 'मोसे छल किए जाएÓ के लीड एक्टर विजयेंद कुमेरिया (अरमान) ने शो के प्रमोशन के दौरान न्यूज टुडे से कही।


४ मार्च से शुरू होने वाले इस धारावाहिक में सौ्या और अरमान की शादी के लिए क्या चुनौतियां आती हैं और किस तरह अरमान, सौ्या के साथ छल करता रहेगा, दिखाया जाएगा। मोसे छल किए जाए, दो जुदा इंसानों की कहानी है, जिनमें एक महत्वाकांक्षी और संघर्षशील टीवी लेखिका सौ्या वर्मा और दूसरा है आकर्षक व सफल टीवी प्रोड्यूसर अरमान ओबेरॉय, जिसकी धोखे वाली फितरत भी है।

कोरोना के कारण इंदौर में नहीं शूट, स्टूडियो में ही किया

सौ्या बताती हैं कि सीरियल में उन्हें इंदौर का बताया गया है। इसके चलते जनवरी में इंदौर में भी शूट होना था, लेकिन कोरोना के बढ़ते केस के कारण हो नहीं पाया। इसके चलते हमने मुंबई में ही इंदौर का शूट किया है। हालांकि वहां शूट होने से इंदौर जैसा फील तो नहीं आया क्योकि वह डमी था, लेकिन किरदार में मैंने इंदौर को जैसा महसूस किया, आपका इंदौर वैसा ही है। पहली बार इंदौर आई हूं। अब तक सुना था सबसे साफ शहर, लेकिन आज आंखों से देखा।

लड़कियों को सपने पूरे करने का हक
शादी के बाद और शादी से पहले लड़कियों को भी हक है अपने सपने पूरे करने का। इन सपनों के लिए लड़कियों को भी लडऩा चाहिए। शादी के बाद अकसर लड़कियां अपने सपनों को छोड़कर शादीशुदा जिंदगी में लग जाती हैं। जबकि उनको भी अपने सपने पूरा करने का हक है। यही थीम हमारे सीरियल की है। इसमें मैं (सौ्या) अपने सपने पूरे करने के लिए दिल जान से जुटी हूं। जबकि मेरे सपनों के बीच कई समस्याएं आती हैं। इसमें इमोशन के साथ सस्पेंस भी है।