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बड़ी खबर: भय्यूजी महाराज की पत्नी पर उनके सेवादार को क्या है आपत्ति, पत्नी पर क्यों है शंका

- दूसरी पत्नी की भूमिका पर संदेह जताते हुए सीबीआई जांच व जल्द कोर्ट जाने की लिखी बात- एसडीएम को लिखा पत्र चर्चा में

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बड़ी खबर: भय्यूजी महाराज की पत्नी पर उनके सेवादार को क्या है आपत्ति, पत्नी पर क्यों है शंका

इंदौर. भय्यू महाराज की मौत का मामला अब एक बार फिर चर्चा में है। पहले सोमवार को महाराष्ट्र से आए अनुयायियों ने मौत की जांच पर सवाल उठाए और अब उनके विश्वस्त रहे विनायक के नाम से एक पत्र एसडीएम के पास पहुंचा है। पत्र में विनायक की ओर से भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी को ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाए जाने पर आपत्ति ली है। विनायक का आरोप है कि मौत पर डॉ. आयुषी की भूमिका पर संदेह है। जल्द ही वह सीबीआई जांंच की मांग करेगा व दोषियों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट की शरण लेगा।

जून महीने में जब भय्यू महाराज की मौत हुई उस दौरान उनके सुसाइड नोट से विनायक सामने आया था। सालों से सेवादार की भूमिका निभाने वाले विनायक दुधाले को एक तरह से भय्यू महाराज ने परिवार की जिम्मेदारी सौंपने की बात लिखी थी। उस समय परिवार के लोगों ने मौत को लेकर किसी तरह की आशंका जाहिर नहीं की, लेकिन अब अनुयायी पुलिस की जांच पर असंतोष जाहिर कर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। भय्यू महाराज की मौत के बाद उनके ट्रस्ट श्री सदगुरु दत्त धार्मिक व पारमार्थिक ट्रस्ट व उससी जुड़ी संपत्तियों का मामला भी चर्चा में रहा।
ट्रस्ट में भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी को ट्रस्टी बनाने को लेकर भी बात चल रही थी। एक ट्रस्टी दिलीप भांडवलकर द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद उनकी जगह डॉ. आयुषी को ट्रस्टी बनाने का प्रस्ताव बैठक में पारित हुआ था। उस समय विनायक ने ही प्रस्तावक बनते हुए डॉ. आयुषी का नाम रखा था, जिसे आगे बढ़ाया गया। अब विनायक दुधाले के नाम से एक पत्र सामने आया है, जिसमें विनायक ही डॉ. आयुषी को ट्रस्टी बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति ले रहा है।

पत्र में विनायक का नाम लिखा है, लेकिन उससे संपर्क नहीं होने से उसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है। विनायक के नाम से एसडीएम सुनील झा को दिए गए पत्र की प्रतिलिपि ट्रस्ट के साथ ही अन्य अफसरों को भेजी गई है। पत्र में लिखा है, डॉ. आयुषी के नाम का प्रस्ताव मेरे द्वारा रखा था, लेकिन अब मैं आपत्ति लेता हूं। डॉ. आयुषी ने संस्था व संस्था से जुड़े अन्य लोगों को गलत जानकारी दी है। वह अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाती है, उन्होंने इस प्रकार की कोई शिक्षा नहीं ली है। इसके अलावा उनके द्वारा अनेक जानकारी गलत दी गई, जो संस्था हित में नहीं है। इस बात का अंदेशा उनके नाम के चयन के बाद हुआ है।
पत्र में लिखा है, सदगुरु दत्त धार्मिक व पारमार्थिक ट्रस्ट, यह पब्लिक ट्रस्ट है और मैं इस संस्था का ट्रस्टी हूंं और भय्यू महाराज का निजी सचिव था। महाराज की मृत्यु के बाद परिवार व संस्था का संचालित करने की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है। डॉ. आयुषी ने महाराज की मृत्यु के बाद कई ऐसे फैसले लिए जिससे उनका कार्य संस्था हित में नहीं दिख रहा। इसलिए मैं आपत्ति लेता हूं। वैसे भी भय्यू महाराज की मौत को लेकर जांच चल रही है, जांच पूरी होने के पूर्व संस्था में परिवर्तन करना अनुचित है। मौत के मामले में भी उनकी पत्नी की भूमिका संशयित है। मैं भय्यू महाराज की मौत की जांच सीबीआई से कराने का अनुरोध करने वाला हूं और मैं पत्र के माध्यम से आपको आशवस्त करता हूं कि मौत को लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोर्ट में जाने वाला हूं।

हमें प्रतिलिपि भेजी है, विनायक दो महीने से लापता है

विनायक के पत्र की प्रतिलिपि हमें मिली है। उसने डॉ. आयुषी को ट्रस्टी बनाए जाने को लेकर क्यों आपत्ति ली, इस बारे में कुछ कहीं नहीं जा सकता है। वैसे भी विनायक दो महीने से लापता है, उसके मोबाइल बंद है। गांव में भी नहीं है। हम तो उसकी गुमशुदगी दर्ज कराने की सोच रहे है।

तुषार पाटिल, सचिव ट्रस्ट

अभी चुनाव में व्यस्त होने के कारण में ऑफिस कार्य में ध्यान नहीं दे पा रहा हूं। ऑफिस में अगर लेटर आया होगा तो बाद में देखकर बता पाउंगा।
सुनील झा, एसडीएम