
Madhya Pradesh Police (Photo Source: AI Image)
MP News:मप्र पुलिस अब हाईटेक पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क पर निर्भरता खत्म कर पुलिस खुद का कम्यूनिकेशन सिस्टम तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। नए साल में पुलिस अपने सैटेलाइट (LEO Satellite) की तैयारी शुरू कर रही है। इसके साथ ही सिंहस्थ से पहले प्रदेश में पहली बार फिक्स्ड विंग ड्रोन का उपयोग शुरू होगा। यह प्रोजेक्ट अपने शुरुआती चरण में है और इसकी जिम्मेदारी इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (पीआरटीएस) के अधिकारियों को सौंपी है। टीम वर्तमान में इसकी तकनीकी आवश्यकताओं और आवश्यक डेटा जुटाने पर शोध कर रही है।
उप पुलिस महानिरीक्षक (पीआरटीएस) मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया, सैटेलाइट प्रोजेक्ट फिलहाल प्लानिंग स्टेज में है। इसकी लागत, तकनीकी पहलू और अन्य व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है। अनुमान है कि इस परियोजना पर 150 करोड़ से अधिक का खर्च आ सकता है। सैटेलाइट इसरो की मदद से लॉन्च करने की योजना है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
डीआइजी श्रीवास्तव ने बताया, फिक्स्ड विंग ड्रोन के बाद सैटेलाइट अगला अहम स्टेप होगा। इससे पुलिस के कम्यूनिकेशन नेटवर्क में बाहरी नेटवर्क का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और संचार स्पष्ट व तेज होगा। चूंकि एमपी पुलिस और इसरो दोनों ही सरकारी संगठन हैं, इसलिए साथ मिलकर काम करने से खर्च में काफी कमी आएगी। - सिंहस्थ से पहले पुलिस के पास फिक्स्ड विंग ड्रोन उपलब्ध होंगे। करीब दो माह में ये ड्रोन पुलिस बेड़े में शामिल हो जाएंगे।
-उन्नत संचार प्रणाली बाहरी सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता खत्म होने से वायरलेस संचार पहले से अधिक तेज व सुरक्षित हो जाएगा।
-हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग : दुर्गम इलाकों और अपराधियों के छिपे ठिकानों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें मिल सकेंगी।
यह तकनीक विशेष रूप से बालाघाट जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और राज्य की सीमाओं पर कड़ी नजर रखने में मदद करेगी।
ड्रोन विंग को मजबूत करने इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (पीआरटीएस) में प्रदेश का नोडल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया जा रहा है। यहां प्रदेशभर के लिए ड्रोन पायलट और पेलोड ऑपरेटर (को-पायलट) को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पुलिस द्वारा तीन फिक्स्ड विंग ड्रोन भी खरीदे जाएंगे।
फिक्सड विंग ड्रोनः फिक्सड विंग ड्रोन विमान की तरह पंख वाले होते हैं। ये मल्टी-रोटर ड्रोन की तुलना में अधिक दूरी और अधिक समय तक उड़ान भर सकते हैं। यही कारण है कि इन्हें बॉर्डर पेट्रोलिंग, लंबी दूरी की निगरानी के लिए प्रभावी माना जाता है।
कुछ समय पहले नैनो सेटेलाइट का प्रस्ताव था, लेकिन कुछ समय बाद कुछ जानकारी सामने नहीं आई थी। इसके लिए फंड की जरूरत होती है। अगर सरकार ऐसा कुछ करती है, तो जीएसआइटीएस सपोर्ट करेगा। सैटेलाइट लांच करने के लिए इसरो के एक्सपर्ट लगेंगे। इस क्षेत्र में अब कुछ प्राइवेट सेक्टर भी आ गए हैं, जो लियो (leo) पर काम कर रहे हैं।
इस तकनीक में छोटे-छोटे सैटेलाइट छोड़े जाते हैं। इसका अनुमानित खर्च करीब 150 करोड़ आता है। यह मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट हो सकता है, जिससे वन विभाग सहित अन्य विभागों को भी लाभ मिल सकता है।
Published on:
07 Jan 2026 05:56 pm
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