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भुवनेश्वरी जयंती पर करें आदिशक्ति के इस स्वरूप का पूजन, पूरी होगी हर मनोकामना

इस वर्ष ३ सितंबर को भुवनेश्वरी देवी की जयंती मनाई जाएगी।

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maa bhuvneshwari

इंदौर। भुवनेश्वरी देवी को मां आदि शक्ति का एक रूप माना जाता है। इतना ही नहीं प्रकृति की माता के रूप में भी इनकी पूजा होती है। इस वर्ष ३ सितंबर को भुवनेश्वरी देवी की जयंती मनाई जाएगी। प्राणियों का पोषण करने वाली देवी भुवनेश्वरी का स्वरूप बेहद कांतिपूर्ण और सौम्य है। देवी के मस्तक पर चंद्रमा शोभायमान है। तीन नेत्रों से युक्त् मां भुवनेश्वरी अपने तेज से पूरे लोक को तेजायमान करती है। मां की आराधना से धन, धान्य , वैभव और कई उत्तम विद्याएं भी प्राप्त होती है। यही वजह है कि मां भुवनेश्वरी देवी की जयंती का भी विशेष महत्व है।

अभय प्रदान करती है मां
जयंती के दिन जप, हवन और तर्पण किया जाता है। साथ ही ब्राहमण और कन्याओं को भोजन भी कराया जाता है। माता भुवनेश्वरी का पूजन करते वक्त त्रैलोक्य मंगल कवचम और भुवनेश्वरी कवच का पाठ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा और विधि से जो मां भुवनेश्वरी का पूजन करता है उसकी सब मनोकामनाएं पूर्ण होती है और वो मां भगवती का कृपा पात्र बनता है। भुवनेश्वरी देवी भक्त को अभय प्रदान करती है, जो मां की पूजा पूरे भक्ति भाव से करता है उसके सब दूख दूर होते है और वो जीव जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्ति पा जाता है।

मोहक है मां का स्वरूप

गौर और श्याम वर्ण वाली देवी भुनवेश्वरी के नख में ब्रहमाण का दर्शन होता है। माता का स्वरूप भी बेहद मोहक है। रक्त वर्ण से युक्त सूर्य के समान तेज वाली माता भुवनेश्वरी के तीन नेत्र और चार भुजाएं है। इनकी चारों भुजाओं में वरद मुद्रा, अंकुश, पाश और अभय मुद्रा है। माता के हाथों में गदा-शक्ति का प्रतीक है जबकि आर्शिवाद मुद्रा प्रजा हित का परिचय कराती है। सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक भी यही है।

ये है पूजा के शुभ मुहुर्त

माता के मूल मंत्रों का जाप करने से साधक को मां का आर्शिवाद मिलता है। साधना सिद्धी के उद्देश्य से साधक इनके पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते है। इस मंत्र का जाप करने वाले को सभी सिद्धियां प्राप्त होती है और वो सुख प्राप्त करता है। देवी भुवनेश्वरी की पूजा और साधना के लिए ग्रहण, कालरात्रि, कृष्ण पक्ष की अष्टमी और चर्तुदशी के साथ ही दीपावली और होली को भी शुभ माना गया है।

पूजन विधि
माता की पूजा लाल रंग के पुष्प, कुमकुम, अक्षत, चंदन से की जाती है। इसके साथ ही रूद्राक्ष की माला भी मां को अर्पित की जाती है। ब्राहम्णों का कहना है कि लाल वस्त्र बिछाकर माता की चौकी बनाकर पूजा करना विशेष फलदायक होता है। माता को राज राजेश्वरी भी कहा जाता है। मा आदिशक्ति का ये रूप बहुत दयालु है और भक्तों पर कृपा करने वाला है। जिस भक्त पर मां की कृपा होती है वो मोक्ष प्राप्त करता है।