
महिराज में जमीन का बड़ा खेल, केशव नाचानी सहित 10 पर केस
इंदौर. खजराना क्षेत्र की महिराज गृह निर्माण सहकारी संस्था की करीब 4 एकड़ जमीन की गड़बड़ी मामले में ईओडब्ल्यू ने केशव नाचानी सहित 10 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। संस्था के 45 सदस्यों को भूखंड आवंटित करने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष ने गलत तरीके से जमीन नाचानी को बेची। नाचानी ने गलत तरीके से जमीन पर लोन लिया। बैंक अधिकारी व निजी संस्थाओं के लोगों ने भी अवैध लाभ के लिए गड़बड़ी की।
इओडब्ल्यू के एसपी धनंजय शाह के मुताबिक, महिराज संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष समीर पिता मूसाखान निवासी शराफत नगर खजराना, नोबल रियल एस्टेट के नाचानी निवासी उषानगर, तत्कालीन संयुक्त संचालक टीएंडसीपी वीपी कुलश्रेष्ठ, इंडसइंड बैंक के तत्कालीन मैनेजर राजेश मंगल, तत्कालीन जोनल प्रबंधक धर्मेंद्र जाखोड़िया, तत्कालीन हेड कैपिटल प्रदीप भावे, टाइटल सर्च रिपोर्टकर्ता राधेश्याम माहेश्वरी, राजेश फरक्या, मूल्यांकन कर्ता राजेंद्र गुप्ता, पेगासस असेस्ट्स रीकंस्ट्रक्शन प्रा. लि. के डायरेक्टर को धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी बनाया है। शाह के मुताबिक, डीएसपी विनोद सोनी की जांच के आधार पर केस दर्ज हुआ है। नाचानी चर्चित दीपक मद्दा के साथ खजराना थाने में दर्ज केस में आरोपी है। ईडी ने भी उस पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने जिलाबदर की कार्रवाई शुरू की है।
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45 सदस्यों को भूखंड आवंटित कर रजिस्ट्री भी कराई
एसपी के मुताबिक, महिराज गृह निर्माण सहकारी संस्था ने दिसंबर 1997 में खजराना के पटवारी हल्का नंबर 16 की रकबा करीब 1.639 हेक्टेयर यानी 4.05 एकड़ जमीन ढ़ाई लाख में खरीदी थी। सदस्यों को भवन के लिए भूखंड आवंटित करने के लिए कृषि भूमि खरीदी और इस पर राधे विहार कॉलोनी विकसित करने का उल्लेख किया। वर्ष 1999 से 2005 के बीच 45 सदस्यों को भूखंड आवंटित कर रजिस्ट्री भी कराई गई।
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बगैर जांच के टीएंडसीपी ने पास किया नक्शा
वर्ष 2006 में बिना किसी चुनाव, बैठक के समीर खान को संस्था का अध्यक्ष बना दिया गया। समीर ने संस्था का अलग खाता खोला। फरवरी 2006 में जमीन पर व्यावसायिक नक्शा मंजूर कर टीएंडसीपी में आवेदन किया, जो जुलाई 2006 में मंजूर हुआ। संस्था की जमीन बिना अनुमति के केशव नाचानी, रेणु नाचानी को 2 करोड़ में बेची। इस दौरान सहकारिता विभाग व उसके द्वारा नियुक्त प्रशासक मौन रहे। करीब 58 लाख का इस्तेमाल नाचानी ने किया, शेष का गबन समीर ने किया। 45 सदस्यों को भूखंड की रजिस्ट्री हुई, लेकिन टीएंडसीपी के तत्कालीन संयुक्त संचालक कुलश्रेष्ठ ने बिना जांच व्यावसायिक नक्शा पास कर दिया।
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हर स्तर पर हुई गड़बड़ी
एसपी के मुताबिक, केशव नाचानी ने अपनी फर्म एमपी बुलियन को इंडसंड बैंक से क्रेडिट लिमिट व ओवर ड्राॅफ्ट का ऋण दिलाने के लिए उक्त जमीन को बंधक रखा। बैंक ने 12 करोड़ का लोन स्वीकृत किया। सर्च करने वालों ने भी जमीन के टाइटल की जांच नहीं करते हुए रिपोर्ट दी। मूल्यांकनकर्ता ने भी गत मूल्यांकन किया, जिसके कारण उन्हें भी आरोपी बनाया गया। बैंक अफसरों ने भी गलत तरीके से लिमिट को स्वीकृति दी, इसलिए वे भी आरोपी बने। बैंक ने 17.50 करोड़ की वसूली के लिए खाता एनपीए कर पेगासास असेस्ट्स को बेच दिया। पेगासास कंपनी ने 45 सदस्यों के भूखंड की जांच किए बिना जमीन को 36.11 करोड़ में बेच दिया। उक्त कंपनी के संचालकों पर अवैध लाभ अर्जित करने के आरोप हैं।
Published on:
19 Nov 2023 11:56 am
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