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भाजपा-कांग्रेस दोनों के पास नहीं हैं बीएलए

४ बार मांगने पर भी नहीं दी सूची

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भाजपा-कांग्रेस दोनों के पास नहीं हैं बीएलए

इंदौर। कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल लगातार हारने के बाद भले ही निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े करें, लेकिन आयोग अपना काम पारदर्शी करने का प्रयास करता है। मतदाता सूची शुद्धीकरण के काम में भी राजनीतिक दलोंं से सहयोग की अपेक्षा की जाती है। इसके लिए बीएलए का प्रावधान रखा गया, लेकिन भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही इंदौर में कार्यकर्ताओं के नाम नहीं दे पाए।

लोकसभा चुनाव के बाद लगातार राज्यों में एकतरफा हार के बाद कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल ने निर्वाचन आयोग की शैली पर सवाल खड़ेे कर दिए। आरोप लगाया कि इवीएम में गड़बड़ी हो रही है। इस पर जवाब देने के लिए आयोग ने इवीएम के साथ नई मशीन जोड़ दी, जो वोट डालने के बाद कुछ देर तक बताएगी कि आपने किसको वोट दिया है। यह मामला सुलझा तो मध्यप्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची में फर्जी नाम होने का दावा किया। इसको लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने जून में मुहिम चलाकर नाम जोडऩे व काटने का काम किया।

चौंकाने वाली बात ये है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली कांग्रेस इंदौर में आज तक बीएलए की सूची नहीं दे पाई है। आयोग ने काम में पारदर्शिता लाने के लिए बीएलओ के साथ राजनीतिक दलों के एजेंटों को नियुक्त करने का प्रावधान रखा। ये व्यवस्था करीब १० साल से है, लेकिन इंदौर कांग्रेस ने आज तक एक भी सूची जिला निर्वाचन को नहीं सौंपी।

वहीं, २०१३ के चुनाव से पहले भाजपा ने नौ में से ७ विधानसभा की सूची सौंप दी थी। उसके बाद भाजपा ने भी नहीं दी। मतदाता सूची शुद्धिकरण को लेकर आयोग ने अभियान चलाया, जिसमें बीएलए नहीं होने की वजह से राजनीतिक दल इससे दूर रहे। अब एक से २१ अगस्त तक फिर मतदाता सूची परीक्षण का काम होगा। इसके पहले भी आयोग ने दोनों राष्ट्रीय दलों से सूची मांगी थी, जो नहीं दी गई।

मंगलवार को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन है, जिसको लेकर होने वाली बैठक में भी आग्रह किया है कि दोनों ही दल सूची लेकर आएं। सताने लगा डर सच्चाई ये है कि कांग्रेस के पास कुछ विधानसभाओं में संगठनात्मक ढांचा ही खत्म हो गया है। चुनाव के दौरान आयात करके कार्यकर्ताओं को बूथ पर बैठाया जाता है।

नहीं दे रहे सूची
इधर, भाजपा के पास बूथ पर १०-२० कार्यकर्ताओं की टीम खड़ी है। इसके बावजूद वह सूची नहीं दे रही। वजय ये है कि २०१३ के चुनाव में पार्टी ने सात विधानसभाओं की सूची सौंप दी थी। यह सूची कांग्रेसियों के पास पहुंच गई। कुछ जगह कांग्रेस नेताओं ने उन्हें साधने का प्रयास किया, जिसका पार्टी को खामियाजा भी भुगतना पड़ा।

ये है बीएलए के फायदे
बीएलए राजनीतिक दल की ओर से बूथ पर काम करने वाला अधिकृत कार्यकर्ता होता है। इसकी सूची बीएलओ के पास भी होती है। वह मतदाता सूची के परीक्षण में बीएलओ के साथ घर-घर जा सकता है। वहीं, अभियान के दौरान बूथ पर बैठने का भी अधिकार रखता है। वहीं, बीएलओ द्वारा गड़बड़ी किए जाने की शिकायत सीधे निर्वाचन आयोग को भी कर सकता है, जिस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

ये है इंदौर की स्थिति
कुल मतदान केंद्र - 3109
कुल मतदाता - 24 लाख 52 हजार 297

देपालपुर - 2,20,576
एक नंबर - 3,24, 822
दो नंबर - 3,38,203
ती नंबर - 1,91,601
चार नंबर - 2,51,685
पांच नंबर - 3,56,859
महू - 2,40,299
राऊ - 2,86,133
सांवेर - 2,42,119