
इंदौर. सरकारी विभागों में शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है, जिसका ताजा उदाहरण इंदौर मेट्रो निर्माण से जुड़ी शिकायत में सामने आया है। शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए इंदौर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने के बजाय जबलपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जैसे दूरस्थ जिलों के पुलिस अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। यह बात तब उजागर हुई, जब शिकायतकर्ता को इन जिलों के पुलिस दफ्तरों से बयान देने के लिए तलब किया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन जिलों के अफसरों को जांच सौंपी गई है, वहां मेट्रो का कोई प्रोजेक्ट ही नहीं चल रहा।
शिकायतकर्ताशिकायतकर्ता एसएस पंवार ने बताया कि उन्होंने अब तक मेट्रो ट्रेन के रूट को लेकर तीन बार अलग-अलग शिकायतें की हैं। पंवार का आरोप है कि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए रानी सराय प्रांगण को पुराने वृक्षों सहित परियोजना को सौंप दिया गया है, लेकिन वहां बिना लिखित अनुमति के मौखिक आदेशों के आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उनका कहना है कि मेट्रो प्रोजेक्ट के अधिकारी अधिकारियों को गुमराह कर जरूरत से ज्यादा क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं। रानी सराय प्रांगण की भौगोलिक स्थिति को समझे बिना मनमानी तरीके से निर्माण किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों पेड़ों और हजारों पक्षियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मेट्रो निर्माण के लिए हाल ही में नगर निगम की कई संपत्तियों को पैक कर दिया गया है। साथ ही मेट्रो रूट में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं। पहले रूट का अंतिम निर्धारण किया जाए, उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो, ताकि पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान न पहुंचे।
पंवार ने बताया कि उनकी शिकायतें पीएमओ, एचएमओ सहित एक दर्जन से अधिक विभागों को उचित माध्यम से भेजी गई थीं। बावजूद जांच के नाम पर उन्हें इंदौर से बाहर के जिलों में बयान देने के लिए बुलाया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।शिकायत करने पर बयान के लिए दूसरे जिलों में बुलाया जा रहा
शिकायतकर्ता के अनुसार, पहली शिकायत पर जबलपुर पुलिस के एक अधिकारी ने बयान के लिए बुलाया। उस शिकायत को बंद कर नई शिकायत की गई तो छिंदवाड़ा सीएसपी कार्यालय से बुलावा आया। फिर नई शिकायत दर्ज करने पर हाल ही में पांढुर्णा पुलिस कार्यालय से बयान देने का नोटिस मिला। बार-बार शिकायत और हर बार अलग जिले के पुलिस अफसर को जांच सौंपे जाने से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सवाल : स्थानीय स्तर पर जांच से क्यों बचा जा रहा?सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ी शिकायतों की जांच इंदौर में क्यों नहीं हो रही? क्या स्थानीय स्तर पर जांच कराने से बचा जा रहा है या फिर यह सिर्फ शिकायतों को उलझाने की प्रक्रिया बनकर रह गई है? मेट्रो जैसे बड़े और संवेदनशील प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की शिकायतों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, लेकिन जिस तरह जांच को दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है, उसने प्रशासनिक गंभीरता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
Published on:
21 Jan 2026 05:56 pm
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