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महापौर चुनाव में पर्दे के पीछे काम करने वाले भाजपाई करेंगे गरबा

पुष्यमित्र की निजी टीम होगी एक जाजम पर एकत्र, खास भरत पारिख और नितिन पांडे के नाम पर आयोजन

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महापौर चुनाव में पर्दे के पीछे काम करने वाले भाजपाई करेंगे गरबा

महापौर चुनाव में पर्दे के पीछे काम करने वाले भाजपाई करेंगे गरबा

इंदौर। पुष्यमित्र भार्गव को चुनाव जिताने में पर्दे के पीछे रहकर अहम भूमिका निभाने वाले आज गरबा करेंगे। निजी टीम का एक आयोजन रखा गया है जिसमें परिवार सहित बुलाया गया। पूरे आयोजन की कमान महापौर के खासों ने संभाल रखी है। पूर्व में चुनाव जीतने के बाद भार्गव भाजपाइयों का मिलन समारोह रख चुके हैं।

इंदौर हाई कोर्ट के सबसे बड़े सरकारी वकील होने के बाद पुष्यमित्र भार्गव ने महापौर का टिकट लाकर भाजपा नेता तो ठीक सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था। हालांकि भाजपा के संगठन ने घोषणा के बाद तुरंत मैदान संभाल लिया। चुनाव में काम आने वाली कमेटियों के गठन कर सारे नेताओं को काम पर लगा दिया गया। 1580 बूथों के कार्यकर्ता से लेकर नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे और राष्ट्रीय महासचिव से लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तक ने चुनाव में ताकत झोंक दी। जिसका असर ये हुआ कि 85 में से 64 पार्षद चुनाव जीते और भार्गव ने 1.33 लाख वोटों से झंडा बुलंद किया।

भार्गव के चुनाव में भाजपा संगठन के अलावा एक बड़ी टीम भी पर्दे के पीछे काम कर रही थी। ये टीम उनके निजी संबंधों वाली थी जो उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से लेकर हाई कोर्ट में वकालत के दौरान खड़ी की थी। मदन महल गार्डन से सारी गतिविधि संचालित हो रही थी जिसमें निजी टीम को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई। कुछ साथी तो टिकट घोषणा के बाद से आ गए थे जो मतदान के बाद लौटे। चुनाव जीतने के बाद पूरी टीम का मिलन नहीं हुआ था।

इसलिए शरद पूर्णिमा को अवसर बनाते हुए भार्गव के खास भरत पारिख व नितिन पांडे ने आज रात एक आयोजन रखा, जिसमें उन सभी को न्यौता दिया गया। हवा बंगला केट रोड स्थित 7 स्टेप गार्डन पर होने वाले कार्यक्रम का नाम शरदोत्सव गरबा रास 2022 दिया गया। बकायदा शरद पूर्णिमा पर गरबा रास का आयोजन करने के साथ स्नेह भोज भी रखा गया है। सभी को परिवार के साथ परंपरागत वेशभूषा में आने का आग्रह किया जा रहा है।

अपने नाम से नहीं किया आयोजन
माना जा रहा है कि गरबों के बहाने मिलन समारोह का आयोजन महापौर पुष्यमित्र भार्गव ही करा रहे हैं, लेकिन नाम भारत पारिख व नितिन पांडे का आगे किया गया। भार्गव अपने नाम से करते तो कार्यक्रम में भाजपा के भी नेताओं को बुलाना पड़ता जिसका बंधन रहता।
नहीं बुलाते तो राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा जाते। ऐसे में बुराई लेने के बजाए सहयोगियों के नाम पर आयोजन रखा गया। ऐसे में सवाल उठने पर बोलने को भी हो जाए कि कार्यक्रम मेरा नहीं पारिख व पांडे का है। हालांकि भाजपा नेताओं का एक कार्यक्रम वे पहले ही कर चुके हैं, जिसमें पार्षद व मंडल अध्यक्ष स्तर से ऊपर के जवाबदारों को बुलाया गया था।