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100 रुपए ज्यादा लेकर सिलेंडर कर रहे ‘ब्लैक’

खाद्य एवं आपूॢत विभाग की अनदेखी का फायदा उठा रहे रिक्शा चालक, सडक़ चलते रिक्शा रोको और खरीद लो गैस सिलेंडर

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इंदौर

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Hussain Ali

Mar 28, 2019

इंदौर. लोगों के घरों में गैस टंकियां आने में 8 दिन से भी ज्यादा लगते हैं, वहीं दूसरी ओर गैस एजेंसी के रिक्शा वाले बीच सडक़ पर खुलेआम टंकियां ब्लैक कर रहे हैं। हालत यह है कि 100 रुपए ज्यादा रुपए देकर रिक्शा चालकों से कितनी भी टंकियां ली जा सकती है। पत्रिका एक्सपोज स्टिंग में गैस सिलेंडरों की हो रही कालाबाजारी पर खुलासा करती खास रिपोर्ट, शहर में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के लिए अब नया तरीका अपनाया जा रहा है। गैस एजेंसी संचालकों और रिक्शा चालकों की मिलीभगत की वजह से खुलेआम धड़ल्ले से इन सिलेंडरों को तय दाम से 100 से 150 रुपए अधिक में बाजार में खपाया जा रहा है। सिलेंडरों की इस खरीद-फरोख्त पर गैस एजेंसी अनदेखा कर रही है या यूं कहे की सब कुछ सामने होते हुए भी जानबूझकर अनजान बना जा रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग भी अवैधानिक तरीके से हो रही सिलेंडर बिक्री के मामले पर कार्रवाई नहीं करता है। पत्रिका एक्सपोज रिपोर्टर ने जब शहर के कुछ गैस सिलेंडर डिलिवरी करने वाले लोडिंग रिक्शा चालकों से ब्लैक में गैस सिलेंडर मांगे तो वे तुरंत देने के लिए तैयार हो गए।

- गैस सिलेंडर ब्लैक हो रहे है तो यह चिंता का विषय है। मामले की जांच करवाएंगे। गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
एल मुजाल्दे, नियंत्रक, खाद्य एवं आपूर्ति

फर्जी गैस कनेक्शनों के जरिए पनप रहा है काला कारोबार
शहर की सडक़ों पर दौड़ रहे गैस टंकी की डिलिवरी करने वाले रिक्शा चालक किसी को भी ऊपर से ज्यादा राशि लेकर गैस टंकी दे देते हैं। अमूमन हर सिलेंडर लोडिंग रिक्शा चालक एेसे ही हाथोंहाथ टंकी दे देता है जबकि नंबर वालों के यहां कई दिनों तक टंकियां नहीं पहुंच रही है। जो लोग कनेक्शन होने के बाद भी टंकियां नहीं लेते हैं, वे टंकियां ब्लैक हो रही है। वहीं गैस सिलेंडर कारोबार से जुड़े लोग बताते है कि आधार से लिंक होने के बाद भी फर्जी कनेक्शन से टंकियां ब्लैक की जा रही हैं।

ग्राहक और चालक का गठजोड़
लोडिंग रिक्शा चालकों से बातचीत में ग्राहक और रिक्शा चालकों के बीच सिलेंडरों की कालाबाजारी का गठजोड़ भी उजागर हुआ है। कुछ ग्राहक सिर्फ सिलेंडर बुकिंग कर ही चालकों को सिलेंडर बेचने के लिए दे देते हैं। इससे ग्राहक के खाते में सब्सिडी की राशि आ जाती है वहीं रिक्शा चालक उस सिलेंडर को ब्लैक में बेच कर अपना मुनाफा काट लेते हैं। ऐसे में दोनों को ही एक सिलेंडर में करीब 300 रुपए का फायदा होता है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में रोजाना करीब 5 हजार से ज्यादा सिलेंडरों की कालाबाजारी होती है।

विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
रिक्शा चालक खुलेआम टंकियां ब्लैक कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कनेक्शनधारी ग्राहकों के सिलेंडरों की डिलिवरी पर पड़ रहा है। लोगों को कई दिनों तक गैस सिलेंडश्र का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग मामले की जानकारी होने के बावजूद अमले की कमी होने का हवाला देकर कार्रवाई से बचता है। यहां तक कि कंपनी के सेल्स ऑफिसर भी इस मामले की अनदेखी कर रहे हैं।

जितनी बोलो उतनी मिलेगी टंकी
धार रोड पर खड़े भारत गैस के स्वस्तिक गैस एजेंसी के रिक्शा चालक से बातचीत के अंश
रिपोर्टर - टंकी मिल जाएगी।
रिक्शा चालक - टंकी नंबर की है क्या।
रिपोर्टर - नंबर की नहीं है।
रिक्शा चालक - ब्लैक में चाहिए।
रिपोर्टर - हां, ब्लैक में चाहिए।
रिक्शा चालक - मिल जाएगी कहां चाहिए।
रिपोर्टर - यहीं चाहिए, कितने की है।
रिक्शा चालक - 850 रुपए में मिल जाएगी।
रिपोर्टर - 850 रुपए तो ज्यादा है।
रिक्शा चालक - 850 ज्यादा कहां है।
रिपोर्टर - नंबर वाली कितने की आ रही है।
रिक्शा चालक - 730 रुपए की।
रिपोर्टर - तो उसमें सब्सिडी भी तो आती है।
रिक्शा चालक - आती है न सब्सिडी।
रिपोर्टर - कितने की आ रही है।
रिक्शा चालक - 225 की सब्सिडी है, 500 रुपए की पड़ रही है टंकी
रिपोर्टर - फिर इतने क्यों ले रहे हो।
रिक्शा चालक - वो नंबर की है ये ब्लैक की टंकी है।
रिपोर्टर - अभी तो एक चाहिए। फिर दो तीन और चाहिए। कार्यक्रम के लिए।
रिक्शा चालक - ले लो न कहां मना किया है।
रिपोर्टर - अभी कितनी दे दोगे
रिक्शा चालक - ले लो, जितनी भी चाहिए मिल जाएगी।
रिपोर्टर - भाव ज्यादा बोल रहे हो।
रिक्शा चालक - आप बोलो कितने दोगे।
रिपोर्टर - 725 या 750 रुपए में ली थी हमने पहले।
रिक्शा चालक - पिछले महीने ली होगी, पहले रेट कम था।
रिपोर्टर - नंबर वाली कितने दिन में आ रही है।
रिक्शा चालक - 8 दिन में आ रही है, माल ही नहीं मिल रहा है। आप तो बोलो कितने दोगे।

कनेक्शन वालों की देंगे टंकी
रिंग रोड पर एचपी गैस के आशांवित गैस एजेंसी के रिक्शा चालक से बातचीत के अंश
रिपोर्टर - सिलेंडर मिल जाएगा क्या।
रिक्शा चालक - हां, मिल जाएगा।
रिपोर्टर - कितने की है सिलेंडर
रिक्शा चालक - अभी 800 रुपए की है।
रिपोर्टर - नंबर वाला सिलेंडर कितने में आ रहा है।
रिक्शा चालक - 725 रुपए का।
रिपोर्टर - क्यों, 600 या 650 रुपए की पड़ती होगी ना, सब्सिडी भी तो आएगी।
रिक्शा चालक - वो तो ग्राहक के खाते में जाएंगे। कही भी जाओगे तो यहीं रेट मिलेंगे।
रिपोर्टर - तो क्या कनेक्शन वाली देते हो।
रिक्शा चालक - हां जिसको नहीं चाहिए रहती है। कस्टमर का फायदा रहता है इसमें। सब्सिडी उनको मिल जाती है। कुछ रुपए हमे मिल जाते है।
रिपोर्टर - नंबर वो ही लगाते है क्या।
रिक्शा चालक - हां उनका फायदा रहता है।