
इंदौर. इंदौर धर्मप्रांत की समाजसेवी दिवंगत सिस्टर रानी मारिया को 4 नवंबर को धन्य घोषित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के प्रमुख कार्डिनल ही शामिल होंगे। समारोह में वेटिकन सिटी से पोप फ्रांसिस के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
कैथोलिक समाज के बिशप चाको ने बताया, सेंट पॉल स्कूल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में सिरो मलंकरा के कार्डिनल बसेलियो क्लिमिस, सिरो मलाबार कार्डिनल जॉर्ज अलचेरी, मुंबई के कार्डिनल असवाल ग्रेशियस और रांची कार्डिनल तेलेस्फोर टोप्पो भी शामिल होंगे। सीबीसीआई के अध्यक्ष, कार्डिनल, क्लिमिस और कई बिशप के साथ हजारों की संख्या में फादर व सिस्टर आएंगे। इंदौर धर्मप्रांत और फ्रांसिसकन क्लेरिस्ट धर्मसंघ के संयुक्त तत्वावधान में सिस्टर रानी मारिया को धन्य घोषित किया जाएगा। 3 नवंबर को शाम 7 बजे संध्या प्रार्थना, 4 को धन्य घोषणा उत्सव, 5 को धन्यवाद मिस्सा सुबह 10 बजे होगी।
रानी मारिया का इतिहास
सिस्टर 29 जनवरी 1954 को केरल के गांव में एक किसान परिवार में जन्मी थी। 1974 में व्रत धारण कर सिस्टर बनी। 1992 में देवास जिले के उदयनगर में नियुक्ति हुई। गरीब और भूमिहीन के अधिकारों के लिए लड़ती रही। 25 फरवरी 1995 को हत्या हो गई। 2002 में उनकी छोटी बहन ने हत्यारे को राखी बांधकर माफ कर दिया। सिस्टर का पार्थिव शरीर उदयनगर के गिरजाघर के बाहर दफनाया गया, लेकिन बाद में उनके अवशेष को चर्च के अंदर नवनिर्मित समाधि में रखा गया।
यह हुई थी प्रक्रिया
सिस्टर मारिया ने उदयनगर क्षेत्र में गरीबों की सेवा करते हुए उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान में मददगार रहीं। उनकी इन्हीं सेवाओं को देखते हुए वेटिकन सिटी ने उन्हें सर्वेंट्स ऑफ गॉड की उपाधि से पहले ही नवाज चुकी है। तीन स्तरों पर दी जाने वाली उपाधियों में अब दूसरे स्तर पर गॉड ऑफ ब्लेस्ड यानि धन्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बता दें कि 21 साल पहले 25 फरवरी 1995 को उदयनगर से पिपल्दा मार्ग पर बस में जा रही सिस्टर मारिया की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। मिर्जापुर चर्च के पादरी फादर जॉली ने इस मामले में ज्यादा कुछ भी बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय है और इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं।
सिस्टर की पार्थिव देह अब रहेगी चर्च के अंदर
बागली एडीओपी संजीव कुमार पाठक, मिर्जापुर चर्च के पादरी फादर जॉली और वेटिकन सिटी रोम से चुनकर भेजे पांच सदस्यीय पैनल ने समाधि की खुदाई कराई। इसके बाद शव का परीक्षण किया गया। वाइन और ब्रेड रखकर पैनल ने प्रार्थना की। अब उनका पार्थिव शरीर चर्च के अंदर रहेगा, क्योंकि उसे विशेष दर्जा दिया जाना है। गॉड ऑफ ब्लेस्ड यानी धन्य करने की प्रक्रिया के बाद वेटिकन सिटी रोम में गॉड ऑफ सेंट की उपाधि देने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया धन्य होने के बाद ही शुरूकी जाएगी। अगर इन्हें संत की उपाधि मिली तो वह देश की चौथी ईसाई होंगी, जिन्हें संत का दर्जा दिया जाएगा।
Published on:
23 Oct 2017 09:38 pm
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