
इंदौर. बाम्बे अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले 15 प्रतिशत गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट के आदेश के कुछ बिंदुओं पर संशोधन के लिए अस्पातल प्रबंधन द्वारा पेश की रिव्यू पीटिशन (पुनर्रिक्षण याचिका) सोमवार को निराकृत कर दी गई है।
कोर्ट ने अस्पताल द्वारा उठाए गए मुद्दों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अस्पताल में आने वाले कुल मरीजों में से 15 प्रतिशत का मुफ्त इलाज करना होगा। सिर्फ जनरल वार्ड के 86 बेड का 15 प्रतिशत नहीं होगा। कोर्ट ने भी कहा है कि यदि जनरल वार्ड में स्थान नहीं है तो प्राइवेेट वार्ड में गरीबों का इलाज करना होगा। इस मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले धीरज मोहनिया के वकील उपेंद्र सिंह के मुताबिक अस्पताल की रिव्यू पीटिशन पर जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेन्दर सिंह की युगल पीठ ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि बाम्बे अस्पताल में उन सभी बीमारियों का इलाज करना होगा जो एमवाय अस्पताल में नहीं है। पिछले आदेश में कोर्ट ने बीपीएल कार्ड धारक को ही मुफ्त इलाज की श्रेणी में रखा था लेकिन अब कम आय वर्ग के अन्य लोगों को भी शामिल किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी रिव्यू पीटिशन में मुद्दा उठाया था कि वे उनके अस्पताल में मरीजों की फ्री ओपीडी चलती है, इस पर कोर्ट ने कहा आप को वहां आने वाले 15 प्रतिशत मरीजों का मुफ्त इलाज के अलावा उन्हें लगने वाली दवाइयां और जांचे भी फ्री करना होगी। पूर्व में हाई कोर्ट के आदेशों का पालन कराने और मुफ्त इलाज की व्यवस्था की मॉनिट्रिंग के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई थी, अब उसके सदस्यों की संख्या चार कर दी है। कमेटी के अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट चम्पालाल यादव के अलावा विनोद पाटीदार, एमजीएम कॉलेज के डीन और एमवाय के सुप्रीडेंट शॉमिल रहेंगे। कोर्ट ने अक्टूबर में जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।
Updated on:
27 Feb 2018 10:45 am
Published on:
27 Feb 2018 08:52 am
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