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आए थे वर-वधू पसंद करने, नदियों के संरक्षण की शपथ ली

हजारों समाज बंधुओं ने तलाशे रिश्ते, प्रत्याशियों ने दिया परिचय, माहेश्वरी समाज करेगा नदियों का संरक्षण

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इंदौर. श्री माहेश्वरी विवाह प्रकोष्ठ सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय परिचय सम्मेलन के समापन अवसर पर समाज बंधुओं ने जहां बहू या दामाद की तलाश की, वहीं आगे की पीढ़ी के लिए नदी संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया। नदी संरक्षण के साथ ही क्षेत्र की सूखती नदी को पुनर्जीवित करने की शपथ भी ली।

शनिवार को दस्तूर गार्डन में सम्मेलन के समापन अवसर पर शाम तक 60 से अधिक रिश्ते तय होने की सूचना थी तो 400 रिश्तों पर चर्चा चल रही थी। मंच से 250 से अधिक प्रत्याशियों ने जीवनसाथी को लेकर प्रत्याशियों ने पसंद भी बताई। ट्रस्ट संस्थापक रामवल्लभ गुप्ता एवं अध्यक्ष कमलनारायण भुराडिय़ा ने बताया, शनिवार को हजारों समाजबंधु सम्मेलन में शामिल हुए। अभिभावकों के साथ प्रत्याशियों ने भी नदी अभियान का समर्थन कर मोबाइल से मिस्ड कॉल कर अभियान से जुड़े। समापन अवसर पर मुख्य रूप से कल्याणमल मंत्री, बसंत खटोड़, सतीशचंद्र मूंदड़ा, कमल लड्ढा, अजय सारडा, रमेश बलदेवा, उषा भुराडिय़ा, महेश साबू, गोपाल राठी, प्रीतिश मंत्री, रितेश राठी भी शामिल हुए।

देश की कई नदियां विलुप्त के कगार पर हैं। अगर इन्हें संरक्षित नहीं किया तो कुछ समय बाद पानी की किल्लत होगी। लोगों को पीने का पानी भी नसीब नहीं होगा। न तो खेती होगी और न ही जल स्तर रहेगा। नदी संरक्षण के लिए समाज हर तरह से काम करेगा। इसमें लोगों को भी जोड़ेंगे।
बसंत खटोड़

पहले नदियों के पाट इतने चौड़े होते थे कि देखते ही बनते थे। धीरे-धीरे मनुष्य ने अपने लाभ के लिए नदियों को छोटा करना शुरू कर दिया। सूख रही नदियों को बचाने के लिए सरकार के साथ हम भी जुडक़र हरसंभव प्रयास करेंगे। नदी संरक्षण अभियान में हमने भी समर्थन दिया है।

कल्याणमल मंत्री

नदी संरक्षण बहुत जरूरी है। नदियां नहीं होंगी तो कई क्षेत्र रेगिस्तान बन जाएंगे। जल से जीवन है, समृद्धि है और देश-प्रदेश का विकास है। पानी के बगैर सब सूना है। परिचय सम्मेलन में की गई नदी संरक्षण अभियान की पहल सराहनीय है। हम भी इसके लिए काम करने को तैयार हैं।

सरिता बियानी, अध्यक्ष, मध्य क्षेत्र माहेश्वरी सखी संस्थान

अगर नदियों में पानी नहीं होगा तो जल स्तर भी नहीं होगा। नर्मदा-गंगा अगर विलुप्त हो जाएं तो जमीन का जल स्तर खत्म होने क साथ ही पीने के पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा। जल है तो ही जीवन है। समाज जल संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करेगा। समाजजन को इस काम में मिशन की तरह जोड़ा जाएगा।
शीतल माहेश्वरी