
इंदौर. कैंसर की बीमारी के लिए आमतौर पर लोग एलोपैथी का ही इलाज कराते हैं। इसी बीच आयुर्वेद में कैंसर का इलाज है। शहर के अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में कैंसर की अलग एक यूनिट है। आयुर्वेद के दो डॉक्टर कैंसर के मरीजों को इलाज आयुर्वेद की दवाओं से कर रहे हैं। कैंसर के घाव को भरने के लिए गाय के घी से बनी दवा कारगर है।
अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में हर माह करीब 50 मरीज कैंसर का इलाज कराने आते हैं। डॉ अखिलेश भार्गव के निर्देशन में कैंसर की यूनिट चल रही है। उनके साथ डॉ श्वेता वर्मा भी इलाज करती है। बुजुर्ग मरीज सबसे ज्यादा यहां आते हैं क्योंकि उन्हें कीमोथैरेपी और रेडिएशन से इलाज नहीं किया जा सकता है। उन्हें आयुर्वेद की दवा दी जाती है। भार्गव ने बताया कि हजारो वर्ष पूर्व सुश्रुत संहिता में अर्बुद अर्थात कैंसर के कारण, लक्षण और चिकित्सा का वर्णन है। औषधियां जीन स्तर पर प्रभाव डालती है हर म्यूटेशन पर कारगर है।
गाय के घी से बनी दवा समेत कई औषधियां
भार्गव ने बताया कि कैंसर के घाव में गाय के घी से बनी दवाइयां का अच्छा प्रभाव है। इन दवाओं को लगाने से घाव जल्दी भरता है। इसके अलावा घाव को धोने में, पट्टी करने में भी आयुर्वेदिक दवा का प्रयोग किया जाता है। मरीज को काफी अच्छा लाभ भी मिल रहा है। इसके अलावा जैविक हल्दी, व्हीटग्रास, काली तुलसी, सदाबहार, सहजन, मुलेठी, काली मिर्च, आमलकी, स्वर्ण भस्म, हीरक भस्म, हरताल, रस सिंदूर, तांबूल, पन्ना पिष्टी, मोती पिष्टी, नीलम , अश्वगंधा, शिरीष, कालमेघ गूगल समेत कई औषधियों से डॉक्टर कैंसर का इलाज करते हैं। ये दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर कैंसर के मेटास्टेसिस को रोकती है। दवाएं डॉक्टर की सलाह से ली जानी चाहिए।
Published on:
04 Feb 2022 01:50 pm
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